ऊर्जांचल में हाईवे पर बने बड़े-बड़े गड्ढे हादसे को दावत दे रहे हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) और राज्य राजमार्ग (एसएच) दोनों के हालात करीब-करीब एक जैसे हो गए हैं। पटरियां ध्वस्त पड़ी हैं। 24 घंटे छाए रहने वाली धूल से आवागमन पहले से दुश्वारी भरा है। गड्ढों ने बाइक सवारों को आए दिन चोटिल करना शुरू कर दिया है। बारिश के समय गड्ढों का पता न चलने से पैदल और बाइक सवारों को बड़े वाहनों की चपेट में आने का खतरा बढ़ गया है।
प्रदूषित जोन में होने के कारण ऊर्जांचल की सड़कों को गड्ढामुक्त रखने के लिए कई बार निर्देश जारी हो चुके हैं। एनजीटी के निर्देश पर हालात का अध्ययन करने आई एनजीटी भी स्थिति पर चिंता जता चुकी है। सड़कों पर गड्ढे, ध्वस्त पटरियों को हादसों, इसके चलते होती मौतों के लिए तो जिम्मेदार माना ही गया है। साथ ही प्रदूषण को भी प्रमुख कारक माना गया है। कोर कमेटी की रिपोर्ट में जिक्र है कि सड़कें खराब होने के कारण ट्रकों पर लदा कोयला सड़क पर गिर रहा है, इससे सड़क के साथ ही आसपास के लोगों को प्रदूषण का दंश झेलना पड़ रहा है।
हाल यह है कि डिबुलगंज से लेकर औड़ी मोड़ के बीच काफी संख्या में गड्ढे बन चुके हैं। बारिश के साथ गड्ढे चौड़े होते जा रहे हैं। काशी मोड़ के पास आधी सड़क गड्ढे में तब्दील है। वीआईपी गेस्टहाउस मोड़ पर सड़क के हर तरफ गड्ढे ही गड्ढे हैं। औड़ी मोड़ पर भी गड्ढों का खौफ राहगीरों की नींद उड़ाए हुए है। एनजीटी गड्ढे भरने, पटरियों को दुरुस्त रखने का निर्देश दे चुकी है लेकिन कवायद कागजों तक सिमटी है।