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Sonebhadra News: स्टेडियम में असुविधाओं का कब्जा, खेतों में खेल रहे खिलाड़ी

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हर मंडल में एक स्टेडियम और हर गांव में खेल मैदान बनाने का दावा खोखला ही साबित हो रहा है। जिला स्तर पर एक स्टेडियम को छोड़ दें तो गांवों में खेल मैदान की स्थिति खराब है। खेल मैदान के लिए आरक्षित भूमि कहीं अतिक्रमण है तो कहीं चारागाह बन गया है।
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असुविधाओं के चलते ज्यादातर गांवों में बच्चे खेत-खलिहान में ही खेलने को विवश हैं। आदिवासी बहुल जिले में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं है। यहां के रामबाबू ने पगडंडियों पर दौड़कर एशियन गेम्स में पदक जीता तो जीनत आरा सहित कई तीरंदाजों ने राष्ट्रीय स्पर्धाओं में जिले का मान बढ़ाया।
इसके बावजूद नई खेल प्रतिभाओं को तराशने की कवायद नहीं हो रही। हाल यह है कि गांवों में खेल मैदान तक नहीं है। स्कूल-कॉलेजों के अपने मैदान को छोड़ दें तो गांवों में बच्चों के लिए खेत-खलिहान की खेलने-कूदने की जगह रह गई है।
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नगरीय क्षेत्रों में खेल मैदान की जगह पार्क ने ले लिया है। ऐसे में प्रतिभाओं को अपना हुनर दिखाने का मौका नहीं मिल पा रहा। रॉबर्ट्सगंज नगर के मध्य शिवाजी मिनी स्टेडियम जरूर है, लेकिन समतल जमीन न होने से यहां अक्सर खिलाड़ी गिरकर चोटहिल होते हैं।
बरसात में पानी भर जाता है। तियरा स्थित जिला स्टेडियम में भी सुविधाओं का अभाव है। न पर्याप्त कोच हैं और न ही उपयुक्त संसाधन। चुर्क में खिलाड़ी उबड़-खाबड़ पहाड़ी पर हॉकी खेलने को मजबूर हैं। वह लंबे समय से खेल मैदान की मांग कर रहे हैं।
इसके लिए वादे भी किए गए, लेकिन पूरा नहीं किया जा सका। नगवां ब्लॉक में युवा कल्याण विभाग का इनडोर स्टेडियम वर्षों से निर्माणाधीन है। जिला युवा कल्याण अधिकारी शशिभूषण शर्मा ने बताया कि नगवां के मिनी स्टेडियम बनकर तैयार हो चुका है। उसे जल्द ही हस्तांतरित कर खेलकूद शुरू करा दिया जाएगा।

622 गांवों में सिर्फ आठ में बने खेल मैदान
ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा के तहत खेल मैदान बनाने की योजना थी। जिले में 622 ग्राम पंचायतें हैं। इसमें सिर्फ आठ में ही खेल मैदान बन पाया है। रॉबर्ट्सगंज ब्लॉक के लसड़ा और कोटास में खेल मैदान का निर्माण हुआ है। बाउंड्री निर्माण के साथ उसमें स्टोर रूम और शौचालय की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। इस वर्ष पुरना और परासी पांडेय में खेल मैदान प्रस्तावित है। इसके अलावा चोपन ब्लॉक में दो, म्योरपुर, दुद्धी, नगवां और घोरावल में एक-एक खेल मैदान का निर्माण हुआ है। बभनी, चतरा, कोन और करमा में खेल मैदान नदारद है।

खिलाड़ियों के लिए छोटा पड़ रहा मिनी स्टेडियम
राॅबर्ट्सगंज अंतर्गत कठपुरवा मिनी स्टेडियम 1999 में जिला युवा कल्याण विभाग की ओर से बनवाया गया था। पिछले कई वर्षों से यहां कोई बड़ी प्रतियोगिता नहीं कराई गई।इससे ग्रामीण खिलाड़ियों में खेल के प्रति रुचि कम हो रहा है। इस मिनी स्टेडियम में खेल चुके अरविंद कुमार सिंह, आशीष कुमार सिंह, विजय कुमार सिंह, महेंद्र कुमार यादव, विवेक कुमार, विनोद कुमार, श्रीप्रकाश, राजेश आदि ने बताया कि यहां के कई खिलाड़ी राज्य एवं राष्ट्र स्तर तक पहुंच चुके हैं। अगर स्टेडियम की व्यवस्था सुधरे तो और अच्छे खिलाड़ी निकलेंगे। इस संदर्भ में डीआई महेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि यहां 400 वर्ग फीट एरिया की जरूरत है, जो कम है। इस कारण जिले स्तर की प्रतियोगिता इस स्टेडियम में नहीं हो पाती है। जिला स्तर की प्रतियोगिताएं तियरा स्टेडियम में कराना पड़ता है। यहां सारी व्यवस्थाएं व्यवस्थित हैं।

तीरंदाजी, एथलेटिक्स, फुटबाल सहित कई अन्य खेलाें के कोच उपलब्ध हैं। अन्य खेलों में कोच के लिए चयन की प्रक्रिया निदेशालय स्तर से ही जा रही है। जल्द ही नए कोच भी मिल जाएंगे। विभाग के शेड्यूल के अनुसार नियमित प्रतियोगिता कराई जाती हैं। खिलाड़ी ही कम आते हैं। -शमीम अहमद, जिला खेल अधिकारी।
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