आग उगलती सूरज की किरणों के साथ ही बिजली खपत में भी बढ़ोत्तरी का क्रम बना हुआ। बुधवार को जहां पीक आवर में बिजली खपत 17 हजार मेगावाट पहुंच गई। वहीं न्यूनतम मांग भी 11 हजार मेगावाट से बढ़कर 13611 मेगावाट पहुंच गए। दिन के अधिकतर समय यह मांग 14 से 15 हजार मेगावाट बनी रही। इसके चलते बेहतर आपूर्ति बनाए रखने के लिए करीब सवा आठ रुपये प्रति यूनिट तक बिजली खरीदनी पड़ी।
पखवारे भर पूर्व आपूर्ति के घंटों में हुई बढ़ोत्तरी के समय से ही पीक आवर में अचानक से मांग में उछाल का क्रम बना हुआ है। बुधवार को न्यूनतम पारे में भी उछाल आने से ऊर्जा जगत में बेचैनी की स्थिति बन गई। राज्य सेक्टर में अनपरा परियोजना की पांच सौ मेगावाट वाली छठवीं, ओबरा परियोजना की दो सौ मेगावाट वाली बारहवीं और पारीक्षा परियोजना की 105 मेगावाट वाली तीसरी इकाई ट्रिप रहने से बिजली उपलब्धता प्रभावित हुआ। इसके चलते राज्य सेक्टर, निजी परियोजनाओं से हुए करार से अधिक बिजली की जरूरत पड़ने से खुले बाजार से महंगे दामों पर बिजली खरीदनी पड़ी।
स्थित यह थी कि सुबह दस बजे के करीब जिस बिजली की कीमत प्रति यूनिट दो से तीन रुपये के बीच थी। बारह बजते-बजते पांच रुपये के करीब पहुंच गई। सिस्टम कंट्रोल के मुताबिक दो बजते-बजते यह हालत हो गई कि प्रति यूनिट करीब सवा आठ रुपये अदा करने पड़े। करीब आधे से एक घंटे यहीं स्थिति बनी रही। इसके बाद मांग कुछ कम हुई, तब बिजली कीमत में गिरावट आई। उधर, राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ के अध्यक्ष जीके मिश्रा का कहना था कि पीक आवर में कभी-कभी ऐसी स्थिति आ जाती है। इससे बचने के लिए राज्य सेक्टर में विद्युत उत्पादन बढ़ाना होगा। मुख्यमंत्री के सामने प्रस्ताव रखा गया है। उन्होंने भी सहमति जताई है।