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Sonebhadra News: पति-पत्नी ने पूर्वांचल में किया कप सिरप का करोड़ों का कारोबार

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सोनभद्र। सोनभद्र में पति तो भदोही में पत्नी के नाम पंजीकृत फर्म के जरिये पूर्वांचल में कफ सिरप तस्करी का करोड़ों का कारोबार किया गया। इसके लिए भदोही की फर्म से भदोही सहित अन्य जिलों में आपूर्ति दिखाई गई। वहीं, सोनभद्र में पंजीकृत फर्म से भी भदोही में कफ सिरप की खेप भेजी गई। कहा जा रहा है कि फर्म की तरह फर्जी ट्रांसपोर्ट कंपनियां भी बनाई गईं थी। कागज में जिस दिन सोनभद्र में कफ सिरप की खेप आई, उसी दिन उसे भदोही पहुंचा दिया गया। ऐसी भी फर्मों को कफ सिरप की आपूर्ति की गई, जिनका कोई वजूद ही नहीं है।
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कफ सिरप तस्करों के नेटवर्क को खंगालने में जुटी एसआईटी को गिरफ्तार किए गए आरोपियों से पूछताछ में फर्जी आपूर्ति से जुड़ीं फर्मों से संबंधित अहम जानकारियां मिली हैं। बताया जा रहा है कि सोनभद्र में पंजीकृत कराई गई मां कृपा मेडिकल और शिविक्षा फर्म को शैली ट्रेडर्स से कफ सिरप को जो आपूर्ति की गई, उसी दिन वह भदोही की फर्म आयुष इंटरप्राइजेज, मेसर्स दिलीप मेडिकल और सयाना नामक फर्म को बेच दी गई। ट्रांसपोर्ट के लिए जिन फर्मों का नाम कागज में दिखाया गया है, उनका भी कोई वजूद नहीं मिला। सूत्रों की मानें तो एसआईटी कथित ट्रांसपोर्ट कंपनियों का रिकाॅर्ड खंगालने में जुटी है। जल्द ही इस मामले में कई नए खुलासे हो सकते हैं।

इस तरह पति-पत्नी की फर्म ने किया अवैध कारोबार
सोनभद्र की शिविक्षा फर्म वाराणसी के विजय गुप्ता और भदोही की राजेंद्र एंड संस ड्रग एजेंसी उसकी पत्नी अंशिका के नाम से है। भदोही में जांच के दौरान पता चला था कि शैली ट्रेडर्स से ड्रग एजेंसी को जो आपूर्ति दिखाई गई, उसे इस एजेंसी ने मेसर्स दिलीप मेडिकल और मेसर्स आयुष इंटरप्राइजेज को बेच दिया। जांच में ड्रग एजेंसी चार महीने से तो दिलीप मेडिकल छह महीने से बंद मिला। आयुष इंटरप्राइजेज के पंजीकरण में जो पता दिखाया गया था, वहां पहुंचने पर उस फर्म का कभी कोई वजूद ही नहीं रहने की बात सामने आई। इन फर्मों के तार आजमगढ़ की फर्मों से भी जुड़े पाए गए थे। अब जो जानकारियां सामने आई हैं, उनके मुताबिक मां कृपा और शिविक्षा फर्म ने भी भदोही की आयुष इंटरप्राइजेज, दिलीप मेडिकल सहित एक अन्य फर्म को लाखों शीशियां कफ सिरप बेच डाला। इस नई फर्म का भी संचालन आयुष की तरह ही किए जाने की चर्चा है। यह नेटवर्क किन-किन फर्मों तक फैला हुआ और इससे कौन-कौन लोग जुड़े हैं, इसकी जांच की जा रही है। साथ ही कफ सिरप की आपूर्ति के लिए किन ट्रांसपोर्ट कंपनियों का इस्तेमाल किया गया और वास्तव में उनकी क्या स्थिति है? इसकी भी जांच की जा रही है।
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वर्जन -
जो भी जानकारियां सामने आ रही हैं, उनके आधार पर कार्रवाई जारी है। अब तक जितनी फर्मों पर प्राथमिकी दर्ज कराई गई है, उनका लाइसेंस निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जांच में जो नई फर्म सामने आ रहीं हैं, उनके खिलाफ भी कार्रवाई कराई जाएगी। -मुकेश पालीवाल, असिस्टेंट कमिश्नर (ड्रग)।
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