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करोड़ाें से बने अस्पताल भवन, उद्घाटन से पहले ही हुए बदहाल

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सोनभद्र। अति पिछड़े जिले की स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के नाम पर नए अस्पताल तो खुलते जा रहे हैं, लेकिन संसाधनों के अभाव में वह खुद बीमार हो रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में जिले में करोड़ों रुपये से नए अस्पताल बने हैं। उद्घाटन से पहले ही इनमें से ज्यादातर अस्पताल बदहाल हो गए हैं। ऐसे अस्पतालों की संख्या दस के करीब है। कहीं खिड़कियों के शीशे टूट गए तो कहीं भवन की दीवारों में दरारें आने लगी हैं। वर्षों से उद्घाटन का इंतजार करते इन अस्पताल में डॉक्टर-कर्मचारी भी तैनात नहीं हो पाए हैं। ऐसे में न मरीजों को अच्छी स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल रहा है और न ही स्वस्थ समाज की सरकार की मंशा फलीभूत हो रही है।
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जिले के दुरूह इलाकों में रहने वालों को अच्छी और सस्ता इलाज मुहैया कराने के लिए अतिरिक्त पीएचसी और न्यू पीएचसी का निर्माण कराया गया है। कुछ अस्पताल पूर्ववर्ती सपा सरकार में स्वीकृत हुए तो कुछ भाजपा सरकार में। स्वास्थ्य पर प्राथमिकता के कारण भवन निर्माण में खूब तेजी दिखाई गई। लोगों को भी लगा कि नजदीक में अस्पताल होने से उनकी दुश्वारी दूर होगी। भवन बनने के वर्षों बाद भी यह दिवास्वप्न ही बना हुआ है। घोरावल, करमा, चोपन, म्योरपुर और सदर ब्लाक क्षेत्र में बने कई अस्पतालों में अब तक किसी डॉक्टर-कर्मचारी की तैनाती ही नहीं की गई है। जहां तैनाती भी हुई तो वहां डॉक्टर नियमित पहुंचते ही नहीं। संसाधनों का भी टोटा बना हुआ है। ऐसे में स्थानीय लोगों की सेहत बिगड़ने पर उन्हें लंबी दूरी तय कर जिला अस्पताल पहुंचना पड़ता है। समय से प्राथमिक इलाज न होने के कारण कई लोगों को अपनी जान तक गवानी पड़ रही है।
इन अस्पतालों का नहीं हुआ संचालन
सोनभद्र। जिले में दस से अधिक अस्पतालों का निर्माण होने के बाद भी उनका संचालन शुरू नहीं हुआ है। करमा ब्लाक के जुड़वरिया गांव में स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण हुआ। इसका भवन बन कर महीनों से तैयार है, मगर लोगों को सेवाएं नहीं मिल पा रहीं। इसी ब्लाक के लोहरतलिया में भवन निर्माण के बाद डॉक्टर और फार्मासिस्ट की तैनाती हुई। तैनाती के बाद भी डॉक्टर पीजी की पढ़ाई के लिए चले गए। अब पूरा दारोमदार फार्मासिस्ट पर है। घोरावल ब्लाक के शिवद्वार, धरसड़ा, मूर्तिया में भी अस्पताल वर्षों से संचालन के इंतजार में है। दोहरी में निर्माणाधीन अस्पताल में फार्मासिस्ट की तैनाती है, लेकिन उन्हें जेल से संबद्ध किया गया है। चोपन ब्लाक के रिजुल और घोरिया में अतिरिक्त पीएचसी में अब तक डॉक्टर की तैनाती नहीं हुई है, जबकि भवन काफी पहले ही बन चुका है। उद्घाटन से पहले ही खिड़कियों के शीशे टूट गए हैं। म्योरपुर ब्लाक के कुदरी में एक साल बाद भी पीएचसी हैंडओवर ही नहीं किया जा सका है। कुछ माह पहले मलेरिया बुखार से 40 से अधिक लोगों की मौत के बाद चर्चा में आए मकरा गांव में भी अस्पताल निर्मित है, लेकिन वर्षों तक इसमें डॉक्टर ही नहीं थे। मौतों का कहर शुरू हुआ तो आनन-फानन यहां डॉक्टर तैनात किया गया।
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टूटने लगी फर्श, दीवारों में दरार
सोनभद्र। करमा ब्लाक के जुड़वरिया में बने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का एक भवन बन रहा है, जबकि अधिकांश हिस्सा पूरा हो चुका है। उद्घाटन से पहले ही कई जगह फर्श टूटने लगा है। दीवारों में भी दरार आ रही है। बाउंड्री में मोटी दरारें देख लोग गुणवत्ता पर सवाल उठा रहे हैं।
दो साल से नया भवन तैयार, संचालन का इंतजार
करमा। सीएचसी करमा का भवन दो वर्ष से बनकर तैयार है। इसे चालू न होने से गंभीर रोगों के इलाज के लिए मरीजों को बाहर जाना पड़ता है। आकस्मिक स्थिति में मरीजों को जिला अस्पताल जाना पड़ता है। परिसर में पहले से संचालित न्यू पीएचसी में मरीजों का इलाज होता है, लेकिन एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड के लिए मरीजों को जिला अस्पताल जाना पड़ता है। इस केंद्र पर दो वर्ष से लैब असिस्टेंट न होने से जांच के लिए लोगों को केकराहीं या जिला अस्पताल जाना पड़ता है। यहां तैनात एलए रामानंद को घोरावल भेज दिया गया, तब से दूसरी तैनाती नहीं हुई। परेशानी को देखते हुए टीबी रोग से संबंधित जांच कार्यकर्ता को सप्ताह में तीन दिन यहां संबद्ध किया गया है, लेकिन उनसे अतिरिक्त काम लेने की वजह से रक्त जांच के लिए मरीजों को परेशान होना पड़ता है।
जिला अस्पताल पर कम होगा बोझ
जिले भर के दस से अधिक संख्या में अस्पतालों का संचालन शुरू न होने के कारण इन क्षेत्रों के लोगों को अपने इलाज के लिए भरी-भरकम किराया देकर जिला अस्पताल जाना पड़ता है। ऐसे में एक ओर जहां लोगों की जेब खाली होती है। वहीं जिला अस्पताल का भी भार काफी बढ़ जाता है। अगर इनका संचालन शुरू होता है। तो जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या में काफी कमी होगी, जिससे सुविधाएं भी बेहतर होंगी।
जिले भर में कुल छह अस्पताल हैंडओवर नहीं हुए हैं। कई स्थानों पर तैनाती भी हुई है। नियमित क्षेत्र का भ्रमण किया जा रहा है। जहां कर्मी नहीं पहुंच रहे हैं। उन पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इनके संचालन में जो भी व्यवधान होंगे उन्हें दूर किया जाऐगा। - डॉ. रमेश सिंह ठाकुर, सीएमओ।
ग्रामीण क्षेत्र में जो भी अस्पताल बनकर तैयार हैं, उन्हें शीघ्र चालू कराया जाएगा। इसके लिए संबंधित विभाग से पत्राचार किया जाएगा। - अरुण सिंह पटेल, प्रतिनिधि, जिला पंचायत अध्यक्ष।
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