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Holi: इस जिले में चार और पांच दिन पहले मनी होली, जानें वजह; वर्षों से चली आ रही है दिलचस्प परंपरा

Sun, 01 Mar 2026 03:52 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, सोनभद्र।

सार

Sonbhadra News: यूपी के सोनभद्र जिले में आदिवासी इलाकों में चार या पांच दिन पहले ही होलिका का दहन हो गया। होली का त्योहार भी मनाया गया। इसके पीछे की वजह वर्षों पुरानी है। बुजुर्गों ने इसकी पूरी कहानी बताई।
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बीती रात होलिका का दहन। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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विंढमगंज जिले में एक तरफ होली मनाने की तैयारियां चल रही हैं तो दूसरी ओर आदिवासी बहुल कई गांवों में 4-5 दिन पहले ही होली मनाई जा रही है। वर्षों से चली आ रही परंपराओं का निर्वहन करते हुए विंढमगंज क्षेत्र के झारखंड व छत्तीसगढ़ की सीमा से सटे बैरखड़ गांव में रविवार को लोगों ने होली मनाई। इससे पहले शनिवार की रात होलिका दहन किया गया। इससे पहले म्योरपुर के चांगा, देवहार गांव में शनिवार को होली मनाई गई थी।

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निवर्तमान ग्राम प्रधान उदय पाल बताते हैं कि गांव में पांच दिन पहले होली मनाने की परंपरा काफी पुरानी है। बुजुर्गों के अनुसार दादा-परदादा के समय होली के दिन गांव में किसी अनहोनी घटना के चलते भारी जन-धन की क्षति हुई थी और महामारी जैसी स्थिति बन गई थी। इसके बाद आदिवासी समुदाय के बुजुर्गों व बैगा ने नियत तिथि से चार-पांच दिन पहले होली मनाने की सलाह दी। तब से यह परंपरा चली आ रही है।

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ग्रामीणों का कहना है कि इसके बाद से गांव में सुख-समृद्धि बनी हुई है। बैरखड़ जनजाति बहुल गांव है। यहां होली के मौके पर पारंपरिक वाद्ययंत्र मानर की थाप पर पुरुष और महिलाएं सामूहिक नृत्य करते हैं। समूह में एक-दूसरे को अबीर लगाते हुए गीत-नृत्य की परंपरा आज भी कायम है। महिलाएं भी बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाती हैं। 

ग्रामीण बताते हैं कि उनकी जनजाति का इतिहास प्राचीन काल से जुड़ा है और वे हर त्योहार अपनी परंपरा और रीति-रिवाज के अनुसार मनाते हैं। पूर्व प्रधान अमर सिंह गोंड, मनरूप गहवां, छोटेलाल सिंह, रामकिशुन सिंह व लाल मोहन गोंड बताते हैं कि पूर्वजों से मिली परंपरा के अनुसार होली नियत तिथि पर नहीं मनाई जाती। 

वर्षों पहले अनहोनी के बाद बैगा ने तिथि परिवर्तन की सलाह दी, जिसे गांव ने स्वीकार कर लिया। होलिका दहन गांव के बैगा के हाथों कराया जाता है। जिस स्थान पर यह अनुष्ठान होता है, उसे ‘संवत डाड़’ कहा जाता है। होलिका दहन के अगले दिन ग्रामीण राख उड़ाते हुए दिनभर होली खेलते हैं और अपने इष्ट देव की आराधना व पूजा-पाठ करते हैं।
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