अनपरा से सटे औड़ी ग्राम पंचायत के बिछड़ी में पहाड़ी पर बनाए गए ऐश डैम के
लिए पहाड़ी की दरारें घातक हो सकती हैं। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है
कि इन दरारों के जरिए मरकरी (पारा) जैसे मानव जीवन के लिए नुकसानदेह
रासायनिक तत्वों का भूजल में रिसाव तो हो ही रहा है,
डैम के भराव के साथ ही
रिसाव के जरिए बढ़ता दबाव ऐश डैम की दीवारों के लिए भी घातक होता जा रहा
है। विशेषज्ञों की मानें तो समय रहते संजीदगी नहीं दिखाई गई तो किसी भी दिन
ऐशडैम औड़ी के लिए बड़ी तबाही का कारण बना नजर आ सकता है।
बताते चलें
कि रेणुसागर स्थित पावर प्लांट से उत्सर्जित होने वाले राख के निस्तारण के
लिए औड़ी के बिछड़ी टोले की पहाड़ी पर ऐशडैम का निर्माण किया गया है। प्रबंधन का दावा रहता है कि डैम के निर्माण में सही इंजीनियरिंग के
इस्तेमाल के साथ ही डैम की बराबर निगरानी बनी हुई है,
लेकिन हजार्ड्स सेंटर
नई दिल्ली के निदेशक दुन्नू राय, लोक विज्ञान संस्थान देहरादून के वरिष्ठ
वैज्ञानिक डॉ. एके गौतम का मानना है कि डैम के निर्माण में दूसरे छोर पर
स्थित पहाड़ी दिवारों की स्थिति का सही तरीके से परिशीलन नहीं किया गया है।
एके गौतम कहते हैं कि डैम की दिवारों से काफी मात्रा में ऐश डैम का पानी
रिसकर भूजल में मिल रहा है। इसके जरिए मरकरी तो भूजल में घुल ही रही है,
अन्य कई हैवी मेटर (खतरनाक रासायनिक तत्व) भी पानी घुल रहे हैं। इससे औड़ी
के साथ ही,भूजल प्रदूषित होने की पूरी संभावना बनी हुई है।
वहीं दुन्नू
राय का दावा है कि रिसाव से भूजल तो प्रदूषित हो ही रहा है, इसका दबाव डैम
की दिवारों पर भी बढ़ रहा है। यदि संजीदगी नहीं दिखाई गई तो किसी भी दिन
डैम की दिवारों के टूटने की स्थिति बन सकती है।
बता दें कि चार-पांच
माह पूर्व अनपरा के दौरे पर आए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के
सेवानिवृत्ति सदस्य सचिव बीसेन गुप्ता ने भी स्थिति को लेकर चिंता जताई थी।
उधर, सामाजिक कार्यकर्ता पंकज मिश्रा का कहना है कि डैम काफी हद तक भर
चुका है।
एनजीटी की कोर कमेटी भी ऊर्जांचल के ऐश डैमों के भराव को लेकर
चिंता जता चुकी है, लेकिन अभी इसको लेकर संजीदगी भरी पहल सामने नहीं आ सकी
है। यदि ऐसा नहीं हुआ तो आने वाले समय में अच्छे परिणाम नहीं होंगे।
औड़ी ग्राम पंचायत के बिछड़ी में पहाड़ी पर बना है ऐश डैम