सोनभद्र। जिले में खून की कमी से गर्भवती महिलाओं की सेहत बिगड़ रही है। अत्यधिक खून कमी के चलते प्रसव के दौरान जच्चा-बच्चा दम भी तोड़ देते हैं। अगस्त में करीब 24665 महिलाएं गर्भवती मिलीं। 3250 महिलाओं में खून की कमी पाई गई है, इनमें से लगभग 1010 महिलाओं में सात ग्राम से कम खून मिला, इस नाते अक्सर उनकी तबीयत खराब रहती है। चिकित्सकों की मानें तो जरूरत के अनुसार महिलाएं पौष्टिक आहार का सेवन नहीं कर रही हैं, इस नाते खून की कमी है।
प्रत्येक माह एएनएम और आशा बहुएं गर्भवती महिलाओं के चिन्हित कर उन्हें जरूरत के अनुसार स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराती है, ताकि जच्चा-बच्चा स्वस्थ रहे, लेकिन नक्सल-दुरुह क्षेत्र की अधिकांश गर्भवती महिलाएं कुपोषण की शिकार हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो अगस्त माह में सदर, घोरावल, नगवां, चतरा, चोपन, दुद्धी, म्योरपुर और बभनी ब्लॉक क्षेत्र में कर्मियों ने करीब 24665 गर्भवती महिलाओं को चिन्हित किया है। जांच करने पर 3250 महिलाओं में खून कम मिला, इनमें लगभग 1010 महिलाओं में सात ग्राम से भी कम खून मिला जो उनके लिए किसी खतरे से कम नहीं है। खून की कमी से दो दिन पूर्व जिला अस्पताल में प्रसव के उपरांत जच्चा-बच्चा की मौत हो गई थी। इस तरह से अक्सर राजकीय और प्राइवेट अस्पतालों में घटनाएं घटित होती रहती हैं। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉॅ. एसपी सिंह ने कहा कि गर्भवती महिलाओं को आयरन की दवाएं दी जा रही हैं। इसके अलावा आशा और एएनएम समय-समय पर महिलाओं को नजदीकी अस्पताल मेें ले जाकर उनका चेकअप करा कर इलाज कराती हैं। महिलाओं से पौष्टिक आहार का सेवन करने की अपील की है। कहा कि अगर किसी भी महिला की तबीयत खराब हो तो तत्काल एंबुलेंस से अस्पताल जाकर उपचार कराएं।