पूछताछ में पकड़े गए नक्सली ने अपना नाम पता मुन्ना विश्वकर्मा उर्फ विद्रोही, उर्फ रामवृक्ष पुत्र तिलकधारी निवासी समाबाध कम्हारडीह थाना राबर्ट्सगंज और अजीत कोल उर्फ अभिषेक उर्फ हरिशंकर कोल पुत्र बहादुर कोल निवासी सनाइत थाना नौगढ़ जिला चंदौली बताया। तलाशी करने पर उनके कब्जे से भारी मात्रा में प्रतिबंधित असलहा और 55 कारतूस बरामद हुआ। बुलेट प्रूफ जैकेट पर दो फायर लगा था। पुलिस ने एफआईआर दर्ज किया। अभियोजन पक्ष की ओर से अपर जिला शासकीय अधिवक्ता विनोद कुमार पाठक और अभियुक्तों की ओर से अधिवक्ता रोशनलाल यादव ने बहस किया।
नक्सलियों को पकड़ने के लिए चोपन थाने में टीम बनाई गई थी। तत्कालीन पुलिस अधीक्षक सुभाष चंद्र दुबे ने मुठभेड़ वाले दिन तत्कालीन सीओ अनिल कुमार यादव, उपनिरीक्षक रविंद्र कुमार सिंह यादव, उपनिरीक्षक जेके सिंह, उपनिरीक्षक शिवानंद मिश्रा, उपनिरीक्षक सुनील चंद तिवारी, उपनिरीक्षक के राममोहन राय, उपनिरीक्षक वीरेंद्र कुमार यादव को पुलिस फोर्स के साथ चोपन थाना पहुंचने का निर्देश दिया। इसके बाद एसपी सुभाष चन्द्र दुबे भी फोर्स के साथ चोपन थाने पहुंच गए।
एसपी के निर्देश पर एसओजी और सीआरपीएफ फोर्स को मौके पर बुलाया गया। चोपन थाने में ही टीम बनाई गई। पहली टीम का नेतृत्व एसपी सुभाष चंद्र दुबे खुद कर रहे थे। वहीं दूसरी टीम का नेतृत्व सीओ ओबरा अनिल कुमार यादव कर रहे थे।
पांच प्रांतों में था नक्सली मुन्ना का आतंक
हार्डकोर नक्सली मुन्ना विश्वकर्मा का आतंक यूपी के साथ ही एमपी, बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ में भी रहा है। इसके ऊपर 10 लाख रुपये का इनाम था। सिर्फ यूपी में तीन लाख का इनाम था। वहीं अजीत कोल के ऊपर 50 हजार का इनाम था। दोनों को वर्ष 2012 में कनछ-कन्हौरा जंगल में दो घंटे तक हुई पुलिस व नक्सली मुठभेड़ के दौरान पकड़ा गया था।