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Sonbhadra: हार्डकोर नक्सली मुन्ना विश्वकर्मा व अजीत कोल को उम्रकैद की सजा, 11 साल पहले मुठभेड़ में पकड़े गए थे

Wed, 07 Feb 2024 12:21 PM IST
प्रगति चंद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सोनभद्र

सार

हार्डकोर नक्सली मुन्ना विश्वकर्मा व अजीत कोल वर्ष 2012 में तत्कालीन एसपी सुभाषचंद्र दुबे के नेतृत्व में कनछ-कन्हौरा जंगल में दो घंटे हुई पुलिस व नक्सली मुठभेड़ के दौरान पकड़े गए थे। इन दोनों को उम्रकैद की सजा के साथ ही 25-25 हजार का अर्थदंड भी लगाया गया है। 
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम एहसानुल्लाह खां की अदालत ने 10 लाख के इनामी हार्डकोर नक्सली मुन्ना विश्वकर्मा और 50 हजार के इनामी नक्सली अजीत कोल को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। दोनों के पास से प्रतिबंधित असलहा बरामद होने के मामले में मंगलवार को सुनवाई हुई।

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दोनों नक्सली पर 25-25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड न देने पर दो-दो वर्ष की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। दोनों नक्सली वर्ष 2012 में तत्कालीन एसपी सुभाषचंद्र दुबे के नेतृत्व में कनछ-कन्हौरा जंगल में दो घंटे हुई पुलिस व नक्सली मुठभेड़ के दौरान पकड़े गए थे।

अभियोजन पक्ष के मुताबिक, 23/24 मई 2012 को सूचना मिली कि कनछ कन्हौरा के जंगल में कुछ नक्सली अपराधियों की चहल-कदमी देखी गई है। जो किसी गंभीर अपराध को अंजाम देने की फिराक में हैं। उनके साथ अन्य प्रांतों के नक्सली संगठन के सदस्य बैठक कर रहे हैं। सूचना पर असलहों से लैस पुलिस टीम कनछ जंगल की तरफ बढ़े तो कुछ दूरी पर कुछ लोग असलहे के साथ बैठे दिखाई दिए। 
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एसपी ने नक्सलियों को आत्मसमर्पण करने को कहा तो नक्सलियों ने पुलिस बल पर अंधाधुंध फायर कर दिया। करीब दो घंटे हुई पुलिस मुठभेड़ के बाद नक्सलियों की ओर से गोलीबारी बंद हो गई। बाद में दो नक्सली को पुलिस ने पकड़ लिया। शेष नक्सली भागने में सफल हो गए।

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चोपन थाने में गठित की गई थी दो टीम

पूछताछ में पकड़े गए नक्सली ने अपना नाम पता मुन्ना विश्वकर्मा उर्फ विद्रोही, उर्फ रामवृक्ष पुत्र तिलकधारी निवासी समाबाध कम्हारडीह थाना राबर्ट्सगंज और अजीत कोल उर्फ अभिषेक उर्फ हरिशंकर कोल पुत्र बहादुर कोल निवासी सनाइत थाना नौगढ़ जिला चंदौली बताया। तलाशी करने पर उनके कब्जे से भारी मात्रा में प्रतिबंधित असलहा और 55 कारतूस बरामद हुआ। बुलेट प्रूफ जैकेट पर दो फायर लगा था। पुलिस ने एफआईआर दर्ज किया। अभियोजन पक्ष की ओर से अपर जिला शासकीय अधिवक्ता विनोद कुमार पाठक और अभियुक्तों की ओर से अधिवक्ता रोशनलाल यादव ने बहस किया।

नक्सलियों को पकड़ने के लिए चोपन थाने में टीम बनाई गई थी। तत्कालीन पुलिस अधीक्षक सुभाष चंद्र दुबे ने मुठभेड़ वाले दिन तत्कालीन सीओ अनिल कुमार यादव, उपनिरीक्षक रविंद्र कुमार सिंह यादव, उपनिरीक्षक जेके सिंह, उपनिरीक्षक शिवानंद मिश्रा, उपनिरीक्षक सुनील चंद तिवारी, उपनिरीक्षक के राममोहन राय, उपनिरीक्षक वीरेंद्र कुमार यादव को पुलिस फोर्स के साथ चोपन थाना पहुंचने का निर्देश दिया। इसके बाद एसपी सुभाष चन्द्र दुबे भी फोर्स के साथ चोपन थाने पहुंच गए।

एसपी के निर्देश पर एसओजी और सीआरपीएफ फोर्स को मौके पर बुलाया गया। चोपन थाने में ही टीम बनाई गई। पहली टीम का नेतृत्व एसपी सुभाष चंद्र दुबे खुद कर रहे थे। वहीं दूसरी टीम का नेतृत्व सीओ ओबरा अनिल कुमार यादव कर रहे थे।

पांच प्रांतों में था नक्सली मुन्ना का आतंक
हार्डकोर नक्सली मुन्ना विश्वकर्मा का आतंक यूपी के साथ ही एमपी, बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ में भी रहा है। इसके ऊपर 10 लाख रुपये का इनाम था। सिर्फ यूपी में तीन लाख का इनाम था। वहीं अजीत कोल के ऊपर 50 हजार का इनाम था। दोनों को वर्ष 2012 में कनछ-कन्हौरा जंगल में दो घंटे तक हुई पुलिस व नक्सली मुठभेड़ के दौरान पकड़ा गया था।
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