सुरक्षित प्रसव को लेकर राज्य सरकार भले ही गंभीर हो और हर गतिविधि पर नजर रखने के लिए अस्पताल में सीसीटीवी कैमरा लगा हो, इसके बाद भी किसी मरीज के प्रति स्वास्थ्य कर्मचारी संवेदनहीन हो तो इसे क्या कहा जाएगा। जी हां लोढ़ी स्थित सदर अस्पताल में स्वास्थ्य कर्मचारियों की असंवेदना गर्भवती महिला के साथ देखने को मिली।
बुधवार को पूर्वाह्न 11 बजे से लेबर रूम के सामने फर्श पर पड़ी कराह रही महिला को अपराह्न तीन बजे के करीब भर्ती कराया गया। कार्यवाहक सीएमएस एसके वर्मा को इस अमानवीय घटना की जानकारी देर शाम तक नहीं थी। पूछे जाने पर कुछ देर बाद उन्होंने बताया कि महिला को भर्ती कर लिया गया है। इस अमानवीय व्यवहार की जांच कराई जाएगी।
शाहगंज थाना क्षेत्र के ओड़ौली गांव निवासी रामनरेश की पत्नी पार्वती (35) गर्भवती है। बच्चे के पैदाइश का समय पूरा होने पर बुधवार को उसका पति उसे लोढ़ी स्थित जिला अस्पताल ले गया। यहां स्वास्थ्य कर्मचारियों का अमानवीय व्यवहार देखने को मिला। महिला दर्द से कराहती हुई प्रसव कक्ष के सामने बरामदे में पड़ी रही।
परंतु वहां तैनात नर्सों को उस पर तनिक भी रहम नहीं आई। वो उसे बेड मुहैया कराना मुनासिब नहीं समझा। परेशान पति जब ड्यूटी पर तैनात नर्स से संपर्क किया तो नर्सों ने उसे बता दिया कि वह उसे किसी प्राइवेट अस्पताल ले जाए। नर्स ने अस्पताल में किसी महिला डाक्टर के न होने का हवाला दिया।
पूर्वाह्न 11 से लेकर तीन बजे तक महिला बरामदे में पड़ी कराहती रही। इस दरम्यान उसकी सुधि लेने वाला कोई नहीं था। इस तरह की अव्यवस्था से निबटने और कर्मचारियों के कार्यों की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए जिला अस्पताल में सीसीटीवी कैमरा लगाया गया है। लेकिन नर्सों को उस कैमरे का भी परवाह नहीं।