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किसान की जमीन धोखे से हड़पने पर आठ बच्चे हो गए अनाथ

Thu, 12 Jul 2018 11:35 PM IST
सोनभद्र ब्यूरो
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पिता की मौत के बाद आठ अनाथ बच्चे - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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बभनी थाना क्षेत्र के मचबंधवा गांव में पहले धोखे से एक किसान का मकान और जमीन रजिस्ट्री करा ली गई। इसके बाद पंचायत की मदद से उस पर कब्जा भी कर लिया गया। इससे सदमे में आए मचबंधवा निवासी दयाशंकर गिरि (45) की गुरुवार सुबह सात बजे संदिग्ध हाल में मौत हो गई। पत्नी की पहले ही मौत हो चुकी है। इस घटना से उसके आठ बच्चे अनाथ हो गए। परिवार वालों की तहरीर पर पुलिस ने दो के खिलाफ मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है।
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मृतक के भाई विद्याकांत के अनुसार जिस जमीन पर वह और उसके भाई दयाशंकर काबिज थे। उसका और मकान का बैनामा अमवार के महेंद्र यादव ने उनके मामा वेद नरायन से मिलकर धोखे से करा लिया। मंगलवार की सुबह इस मुद्दे पर गांव में पंचायत हुई और दयाशंकर पर दबाव बनाकर मकान, जमीन बाग-बगीचे पर कब्जा कर लिया गया। भाई की किसी ने नहीं  सुनी। इससे दयाशंकर सदमे में थे। गुरुवार की भोर में उन्हें अचानक दो बार उल्टी हुई।

उन्हें अस्पताल ले जाया रहा था कि उनकी मौत हो गई। दयाशंकर गांव में मजदूरी करता था। ग्रामीणों की सूचना पर पहुंचे बभनी और म्योरपुर एसएचओ ने ग्रामीणों को समझा-बुझाकर शांत कराया और शव पीएम के लिए सीएचसी दुद्धी भेजा। पुलिस के मुताबिक मामले में वेदनारायण और महेंद्र यादव के खिलाफ आईपीसी की धारा 306 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। उधर, सीओ दुद्धी एसके विश्रोई का कहना था कि मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
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ना छत बची, ना मां-बाप का साया, आंखें ढूंढ़ती रही सहारा      

मचबधंवा में जमीन और मकान छिने जाने के सदमे में डूबे किसान की संदिग्ध मौत के बाद उसके आठ नाबालिग बच्चों पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा है। मां की पहले ही मौत हो चुकी है। मौजूद हालत यह है कि ना तो उनके सिर पर छत बची, ना ही ममता की छांव। ऐसे में अनाथ हो चुके बच्चों की परवरिश कैसे होगी? कौन उनकी देखभाल करेगा? जैसे सवाल लोगों के जेहन में तैरते रहे।  

परिवार में बच्चों की देखभाल के नाम पर महज दादी रह गई है। चार चाचा हैं, लेकिन इन सबसे अलग बच्चे गुरुवार को पूरे दिन गुमसुम हालत में अलग बैठे आंखों से सहारा ढूंढते रहे। इन बच्चों की हालत वहां पहुंचने वालों को झकझोरती रही। मृतक दयाशंकर का सबसे बड़ा बेटा 14 साल का है तो सबसे छोटा बेटा डेढ़ साल का।

ऐसे में इनकी शिक्षा, दीक्षा, परवरिश तीनों को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। बच्चे खुद भी नहीं समझ पा रहे थे कि क्या हो गया। कई लोगों ने उनको कुरेदने की कोशिश की लेकिन उनका जवाब चुप्पी में ही मिला। चाचा और दादी के साथ ही गांव वालों ने भी बच्चों को ढांढ़स बंधाने की कोशिश की लेकिन बच्चों के मासूम चेहरों पर छाई उदासी रूलाई छुड़ाती रही। लोग भी विधि की इस विडंबना के प्रति भौंचक नजर आए।
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