सोनभद्र। राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज, मेडिकल कॉलेज जैसे संस्थान और प्रमुख सरकारी कार्यालय अब अपने लिए खुद बिजली बनाएंगे। इसके लिए कार्यालय भवन की छतों पर सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जाएंगे। खास बात यह है कि रेस्को मोड में लगने वाले इन संयंत्रों के लिए संबंधित विभागों को कोई निवेश नहीं करना होगा। अलबत्ता उनके बिजली के बिल की दर भी कम हो जाएगी। फिलहाल सात संस्थानों व कार्यालयों पर करीब साढ़े 15 सौ किलोवाट के प्लांट लगाने की तैयारी है। इसकी प्रक्रिया शुरू हो गई है।
पर्यावरण संरक्षण के लिए सरकार वैकल्पिक ऊर्जा के स्रोतों के उपयोग को प्रोत्साहित कर रही है। इसके तहत पीएम सूर्य घर योजना में उपभोक्ताओं को अपने घर पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगवाने पर 60 फीसदी तक सब्सिडी दी जा रही है। इसके चलते सौर ऊर्जा संयंत्रों के प्रति लोगों का रुझान तेजी से बढ़ा है। अब शासन ने सरकारी संस्थानों व कार्यालयों पर भी सौर ऊर्जा से बिजली उत्पन्न करने की पहल की है। इसके तहत ऐसे सभी सरकारी, अर्द्ध सरकारी कार्यालयों पर संयंत्र लगाए जाएंगे, जहां बिजली की खपत 25 किलोवाट से अधिक है। पहले चरण में जिले के विभिन्न विभागों के अंतर्गत साढ़े 15 सौ मेगावाट के संयंत्र स्थापित किए जाएंगे। नेडा के परियोजना निदेशक प्रेमशंकर सिंह ने बताया कि रेस्को मॉडल के तहत सोलर पैनल लगाने का सारा खर्च निजी कंपनी उठाएगी। सरकार कंपनी को सब्सिडी देगी और संबंधित संस्थान को बिजली निगम से भी कम दर यानी करीब 4.85 रुपये प्रति यूनिट बिजली मिलेगी। पैनल की देखरेख का जिम्मा भी कंपनी का होगा।
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यहां लगेंगे सौर ऊर्जा संयंत्र
योजना के तहत राजकीय इंजीनियरिंग संस्थान पर 665 किलोवाट की क्षमता का सौर ऊर्जा संयंत्र लगाया जाएगा। इसके अलावा मेडिकल कॉलेज पर संयंत्र की क्षमता 500 किलोवाट की होगी। पीएसी बहुअरा में 50 किलोवाट, पुलिस लाइन में 100 किलोवाट, कलेक्ट्रेट में 100 किलोवाट, विकास भवन में 70 किलोवाट, एकलव्य आवासीय विद्यालय पिपरखाड़ में 50 किलोवाट क्षमता का संयंत्र रेस्को मोड में स्थापित होगा। इसके प्रस्ताव को शासन से मंजूरी मिल गई है। जल्द ही संयंत्र लगने शुरू हो जाएंगे।
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अटल आवासीय विद्यालय में दो मेगावाट का प्लांट
गुरमुरा स्थित अटल आवासीय विद्यालय में भी सौर ऊर्जा संयंत्र लगाया जाना है। यहां बिजली की खपत को देखते हुए प्लांट की क्षमता दो मेगावाट की होगी। इसके लिए पूर्व में अनुबंध पूरा हुआ था, लेकिन बाद में तकनीकी दिक्कतों को देखते हुए इसे रद्द कर दिया गया था। अब नए सिरे से अनुबंध की प्रक्रिया शुरू हुई है।