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UP: किसानों ने पूछा, इतने दिन कहां थे विधायकजी, जमीन नहीं जाएगी इसका लिखित आश्वासन दें; मचा बखेड़ा

Tue, 07 Apr 2026 12:41 AM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, सोनभद्र।

सार

Sonebhadra News: किसानों का यह भी कहना था कि अगर अधिग्रहण की बात अफवाह है तो प्रशासन इस पर स्थिति स्पष्ट करे ताकि लोगों का असमंजस दूर हो सके। विधायक ने इस लहजे पर आपत्ति जताई। कहा कि जब विश्वास नहीं था और ऐसे ही बात करना था तो उन्हें क्यों बुलाया गया। काफी देर तक इसे लेकर बहस चलती रही। बाद में मौजूद प्रबुद्ध लोगों ने हस्तक्षेप कर मामला शांत कराया। 
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आंदोलित किसानों के बीच अपनी बात रखता युवक। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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UP News: औद्योगिक कॉरिडाेर के लिए मधुपुर क्षेत्र के लोहरा, तकिया, बट गांवों की जमीन के सर्वे के बाद से किसानों में बना असंतोष कम नहीं हो रहा। सोमवार को घोरावल विधायक अनिल मौर्य को भी किसानों के गुस्से का सामना करना पड़ा। जमीन अधिग्रहण के विरोध में आंदोलित किसानों से वार्ता के लिए लोहरा गांव की गुलरहवा बस्ती पहुंचे विधायक से किसानों ने कड़ी नाराजगी जताई। 

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साफ शब्दों में कहा कि पिछले 20 दिनों से यह मामला गर्म है, अब तक वह कहां थे। क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि होने के नाते उन्हें इस बड़े मुद्दे की खबर अब तक क्यों नहीं लगी थी। किसानों ने उनसे यह लिखित आश्वासन देने की भी मांग रखी कि उनकी जमीन का अधिग्रहण उद्योग के लिए नहीं किया जाएगा। 

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किसान नाराज

काफी देर तक बहस के बाद विधायक मामले में डीएम से मिलकर वार्ता की बात कहते हुए वहां से लौट गए। जिले में औद्योगिक काॅरिडोर के लिए उपयुक्त भूमि की तलाश की जा रही है। इसके लिए मधुपुर के आसपास लोहरा, तकिया, बट गांवों की जमीन का सर्वे किया गया है। 

यह प्रक्रिया अभी प्रारंभिक चरण में ही है, मगर इसकी भनक लगने के बाद से ही क्षेत्रीय किसान व ग्रामीण लामबंद हैं। वह उद्योग स्थापना के लिए अपनी उपजाऊ भूमि देने को तैयार नहीं है। इसके अलावा दशकों से वहां रह रहे लोग भी अपनी पुश्तैनी भूमि छोड़ने को राजी नहीं है। इसे लेकर किसान लगातार आंदोलन कर रहे हैं। प्रदर्शन, ज्ञापन और महापंचायत भी हो चुकी है। 

सोमवार को इसी मुद्दे को लेकर घोरावल विधायक अनिल मौर्य किसानों से वार्ता के लिए उनके बीच पहुंचे थे। उन्होंने किसानों की समस्या सुनने के बाद उन्हें आश्वस्त किया कि उनके हितों की अनदेखी नहीं होने दी जाएगी। वह किसी भी अफवाह के चक्कर में न पड़ें। उपजाऊ भूमि पर उद्योग नहीं लगेगा। इस बारे में वह उच्चाधिकारियों से वार्ता भी करेंगे। 
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आश्वासन को लिखित देने की मांग

बातचीत का यह क्रम चल ही रहा था, तब तक कुछ किसान इसे लिखित में देने की मांग करने लगे। उनका कहना था कि पिछले 20 दिनों से मामला सुर्खियों में छाया है। पूरे जिले में इसकी चर्चा है, मगर क्षेत्रीय विधायक को इसकी खबर न होना चिंताजनक है और अगर इसकी जानकारी थी तो विधायक अब तक कहां थे। 

विधायक ने आश्वासन दिया कि किसानों की इस समस्या को लेकर डीएम से मिलकर वार्ता करेंगे। जल्द ही सार्थक परिणाम निकलेगा। इस मौके पर संघर्ष समिति अध्यक्ष मनोज कुशवाहा, रविशंकर, दयाराम, बृजेश सिंह, कमलेश, जयप्रकाश, पारस नाथ सिंह, कमलेश सिंह कुशवाहा, चंद्रप्रकाश एडवोकेट, शिवपूजन सिंह सहित सैकड़ों किसान मौजूद रहे।

डीएम से फोन पर वार्ता कर स्थिति स्पष्ट की गई। औद्योगिक कॉरिडोर के लिए सभी तहसीलों में उपयुक्त भूमि का सर्वे कराया जा रहा है। किसानों की उपजाऊ भूमि नहीं ली जाएगी। जो भी पहाड़ी, बंजर या सरकारी भूमि होगी, उसे ही कॉरिडोर के लिए प्रस्तावित किया जाएगा। वार्ता के बाद किसान संतुष्ट हुए हैं। उनमें जो भ्रम था, वह दूर हो गया। -अनिल कुमार मौर्य, विधायक, घोरावल।
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