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Sonebhadra News: दस में से सात सीएचसी पर ही जेनरेटर, चलते हैं सिर्फ तीन पर

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सोनभद्र। जिले के अस्पतालों में बिजली आपूर्ति की वैकल्पिक व्यवस्था ध्वस्त है। दवा-उपचार के दौरान अगर बिजली चली जाए तो अधिकांश स्थानों पर अंधेरा छा जाता है। सीएचसी स्तर पर दस में से सात सीएचसी पर ही जेनरेटर की सुविधा है। इनमें से चोपन, घोरावल और दुद्धी में ही जनरेटर चलते हैं। तेल कम मिलने के कारण अन्य चार पर विशेष परिस्थितियों में ही चलाया जाता है। दो सीएचसी पर इन्वर्टर है। कोन सीएचसी पर इन्वर्टर भी नहीं है। लंबे बिजली कट पर इन्वर्टर भी काम नहीं करते हैं। कहीं, सोलर पैनल खराब पड़े हैं तो कहीं ऑन ग्रिड होने से कटौती की दशा में उसका लाभ नहीं मिल पाता।
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जिले में दस सीएचसी स्थापित हैं। इसके अलावा अनपरा के डिबुलगंज में संयुक्त अस्पताल और 40 से अधिक पीएचसी है। इन अस्पतालों में बिजली का कनेक्शन तो कराया गया है, मगर बिजली कटौती की दशा में निर्बाध आपूर्ति जारी रखने की वैकल्पिक व्यवस्था बदहाल है। दस में सात सीएचसी पर ही जेनरेटर की सुविधा है। कोन, करमा और म्योरपुर सीएचसी पर जेनरेटर नहीं है। यहां इन्वर्टर लगाया गया है, लेकिन लंबे कट की दशा में यह काम नहीं करता। कोन में इन्वर्टर भी नहीं है। ऐसे में यहां बिजली गुल होते ही उपचार ठप हो जाता है। नगवां ब्लॉक की सीएचसी वैनी में जनरेटर है, लेकिन उसका उपयोग विशेष अवसरों पर होता है। सामान्य दिनों के लिए सोलर पैनल स्थापित किया गया है, मगर ऑन ग्रिड होने के कारण यह तभी चलता है, जब बिजली होती है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्राें में वैकल्पिक इंतजाम इन्वर्टर के भरोसे ही। गांवों में अक्सर लंबा कट लगने पर परिसर में अंधेरा छा जाता है।
काम नहीं करता सोलर पैनल
दुद्धी। स्थानीय सीएचसी में करीब 7 वर्ष पहले 25 किलोवाट का सोलर सिस्टम स्थापित किया गया था। अब इसकी बैटरी खराब हो गई है। ऐसे में बिजली कट जाने पर अस्पताल के भीतर अंधेरा छा जाता है। बिजली कटौती पर परिसर में आपूर्ति बंद हो जाती है। 25 केवीए का पुराना जेनरेटर कभी कभी लोड नहीं ले पाता। अधीक्षक डॉ. शाह आलम अंसारी ने बताया कि सोलर बैटरी की गारंटी समाप्त हो गई है। बजट मिलते ही सुविधाओं को दुरुस्त कर दिया जाएगा।
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बिजली जाते ही कोन में उपचार ठप
कोन। जिले के सबसे सुदूर क्षेत्र में स्थित कोन सीएचसी में छह माह पहले तक बिजली भी नहीं थी। काफी प्रयास के बाद यहां बिजली कनेक्शन तो हो गया, लेकिन कटौती से परेशानी बनी है। बिजली जाते ही दवा-उपचार बंद हो जाता है। सबसे बड़ी समस्या रात में इमरजेंसी में होती है। बिजली नहीं रहने पर मोबाइल की रोशनी से प्राथमिक उपचार किया जाता है।
इन अस्पतालों में भी व्यवस्था बदहाल
करमा/केकराही। सीएचसी करमा में बिजली न रहने पर वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है। यहां सोलर पैनल भी नहीं लगाया गया है। बिजली जाने पर मरीजों को भी दिक्कतें हो रही हैं। टीकाकरण की व्यवस्था को समीप स्थित पीएचसी में रखना पड़ता है। वहां सोलर पैनल लगा है। केकराही पीएचसी में बिजली कटौती पर जेनरेटर सहारा बनता है। डॉ. राकेश कुमार मौर्य ने बताया कि बिजली बंद होने पर जनरेटर से काम लिया जाता है। सौर ऊर्जा का प्लेट तो लगा है, मगर काम नहीं करता

बिजली कटते ही ध्वस्त हो गई थी व्यवस्था
करीब एक सप्ताह पहले वैनी सीएचसी की लाइट लाइनमैन ने काट दी थी। इससे रात भर मरीज बिना बिजली के रहे। सोलर सिस्टम ने भी काम नहीं किया। जेनरेटर चालू नहीं कराया गया था।
गश खाकर बेहोश हो गई थी आशा
दस माह पहले सीएमओ कोन सीएचसी में क्षेत्र की आशाओं की बैठक ले रहे थे। उमसभरी गर्मी के बीच बिजली की व्यवस्था न होने से एक आशा गश खाकर गिर पड़ी थी। कुछ दिन पहले अमिला धाम से लौटते समय टेंपो पलटने से घायल यात्रियों को कोन सीएचसी लाया गया। बिजली न होने पर उन्हें बाहर रखा गया था।
सीएचसी स्तर पर जनरेटर की सुविधा दी गई है। उन्हें डीजल के मद में हर माह भुगतान भी होता है। कुछ जगहों पर सोलर सिस्टम भी स्थापित कराया गया है, जिससे वैकल्पिक व्यवस्था बनी रहे। जहां भी दिक्कत है, जल्द सही कराया जाएगा। -डॉ. अश्वनी कुमार, सीएमओ।
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