पुलिस के अनुसार, बरामद गांजा की कीमत करीब 1 करोड़ 60 लाख रुपये आंकी गई है। पकड़े गए तस्करों की पहचान गोंडा के खोड़ारे थाना क्षेत्र के मकोईया निवासी डेविड कुमार चौरसिया और प्रतापगढ़ के अंतू थाना क्षेत्र के पंडित का पुरवा निवासी जगमोहन के रूप में हुई।
इसके अलावा उनके तीन अन्य साथी बबलू, कादिम अली और सिद्धि विनायक फरार हैं। एएसपी ने बताया कि गिरफ्तार तस्कर अंतरजनपदीय नेटवर्क का हिस्सा हैं, जो गांजा तस्करी में लिप्त थे। गिरोह के सदस्य विशाखापत्तनम तक हवाई यात्रा से पहुंचते थे और वहां से सड़क मार्ग के जरिए ओडिशा जाते थे, जहां डीसीएम ट्रक में गांजा लोड कर यूपी लाया जाता था।
ट्रक की लोकेशन देने के लिए तस्करों के साथी आगे-आगे चल रहे थे, जिससे किसी भी पुलिस जांच से बचा जा सके। लगातार हो रही गांजा तस्करी के मामलों पर पुलिस की इस कार्रवाई को बड़ी सफलता माना जा रहा है। एसपी अशोक कुमार मीणा ने टीम को 25000 का इनाम देने की घोषणा की है।
उन्होंने कहा कि जनपद में नशे के कारोबार को पूरी तरह खत्म करने के लिए पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है, जबकि फरार तस्करों की तलाश में पुलिस की कई टीमें दबिश दे रही हैं। पुलिस टीम में एसओजी प्रभारी राम स्वरूप वर्मा, सर्विलांस प्रभारी नागेश कुमार सिंह, शाहगंज एसओ जितेन्द्र कुमार, शाहगंज कस्बा चौकी प्रभारी राम सिंहासन शर्मा आदि मौजूद रहे।
ऐसे करते थे तस्करी
गिरफ्तार टस्करों ने पूछताछ में बताया कि वह फ्लाईट से दिल्ली होकर विशाखापत्तनम जाते हैं। वहां से कटक जाकर एक व्यक्ति बबलू के बताए स्थान पर पहुंचते हैं। फिर बबलू का भेजा गया व्यक्ति एक डीसीएम कंटेनर के अन्दर गांजा रखकर मजबूत प्लेट लगाकर वेल्डिंग करता है, जिससे बाहर से देखने पर खाली दिखाई पड़े। वह उन्हें गाड़ी व एक नई मोबाइल सिम लगाकर देता है।
इस पर गांजा मंगाने वाले व्यक्ति बबलू, सहयोगी सिद्धि विनायक व कादिम अली ही व्हाट्सएप के माध्यम से बात करते थे। गाड़ी को पास कराने के लिए रास्ते में कुछ व्यक्ति जो अन्य गाड़ी से आगे-पीछे चलते हैं।