जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाना अब आसान नहीं होगा। फर्जीवाड़ा रोकने के लिए नियम में सख्ती की तैयारी है। जन्म या मृत्यु के 21 दिन बाद आवेदन करने पर प्रमाणपत्र डीएम के सत्यापन के बाद ही जारी होगा।
अभी तक जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र सरकारी व निजी अस्पतालों के अलावा नगर पालिका व पंचायतों से आसानी से जारी हो जाता था। इससे आए दिन फर्जी प्रमाण पत्र की शिकायतें आती थीं। जिले में भी इस तरह की शिकायतें आम हो चुकी थी। हालांकि अब सांठ-गांठ कर प्रमाण पत्र पर अंकुश लगाने की तैयारी है।
इसके लिए सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (सीआरएस) पोर्टल को अपडेट किया गया है। अपडेशन के चलते पूर्व में पंजीकरण भी प्रभावित रहा। अब पोर्टल सुचारू रूप से चलने लगा है। नई व्यवस्था के तहत जन्म व मृत्यु के 21 दिन के भीतर प्रमाणपत्र अवश्य जारी करवा लें।
इसके बाद से जटिलताएं बढ़ जाएंगी। 21 दिन के बाद से डीएम की ओर से नामित टीम के अप्रूवल के बाद ही प्रमाण पत्र जारी होगा। सरकारी अस्पतालों के अलावा निजी अस्पतालों को भी सीआरएस पोर्टल का यूजर आईडी व पासवर्ड दिया गया है।
यहां होने वाले प्रसव अथवा मौत का पंजीकरण कर प्रमाण पत्र दिया जाता है, मगर यहां भी नए नियम लागू हो गए हैं। जन्म या मृत्यु के 21 दिन बाद आवेदन करने पर प्रमाण पत्र जिलाधिकारी (जिला रजिस्ट्रार जन्म-मृत्यु) के सत्यापन के बाद ही जारी होगा। उनकी ओर से इसके लिए एडीएम को नामित किया गया है। पहले यह सीएमओ की आईडी से स्वीकृत होता था।
तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर का बना दिया था मृत्यु प्रमाणपत्र
जिले में जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े की शिकायतें सामने आती रही हैं। हद तो तब हो गई जब 2 फरवरी 2023 को किसी ने हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री रहे मनोहर लाल खट्टर के नाम का मृत्यु प्रमाण पत्र बनाकर निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर अपलोड कर दिया। प्रमाण पत्र जारी करने वाली संस्था के आगे सोनभद्र के पन्नूगंज/शाहगंज पीएचसी का विवरण दर्ज था। शरारती तत्वों की ऐसी कारस्तानी के सामने आने के बाद यूपी से हरियाणा तक खलबली मच गई थी। प्रशासनिक अमले के भी हाथ-पांव फूल गए थे।