मझौली गांव में सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान से वितरित हो रहे चावल में प्लास्टिक के दाने होने की अफवाह से हड़कंप मच गया। कई कार्डधारकों ने दुकानदार से नाराजगी जताते हुए चावल लेने से इनकार कर दिया। शिकायत एसडीएम से भी की। बाद में जब सत्यता का पता चली कि वो प्लास्टिक का चावल नहीं बल्कि फॉटीफाइड है तब लोग शांत हुए। प्लास्टिक सरीखे दिख रहे दाने प्रोटीन की मात्रा बढ़ाने के लिए मिलाया गया है। इसकी आपूर्ति शासन के निर्देश पर की गई है।
दुद्धी ब्लाक के मझौली गांव में सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान से सोमवार को राशन वितरित हो रहा था। अचानक चावल के कुछ दाने सामान्य से अलग देख कार्डधारक शोर मचाने लगा। उनका आरोप था कि इसमें प्लास्टिक के दाने मिलाए गए हैं। कइयों ने इसे लेने से इनकार कर दिया। मामला तूल पकड़ा तो शिकायत एसडीएम तक पहुंच गई। प्रधान से शिकायत मिलते ही एसडीएम रमेश कुमार ने लेखपाल और आपूर्ति निरीक्षक को जांच के लिए भेजा। आपूर्ति निरीक्षक रामलाल यादव ने बताया कि इस बार सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों पर फोर्टीफाइड प्रोटीन युक्त चावल वितरण के लिए भेजा गया है। चावल में किसी प्रकार की कोई मिलावट या प्लास्टिक के दाने नहीं है। उन्होंने बताया कि सोनभद्र, चंदौली सहित प्रदेश के कई जिलों में प्रोटीन युक्त चावल वितरण किया जा रहा है। वरिष्ठ हॉट निरीक्षक सुरेंद्र पाल ने बताया कि इस बार प्रोटीन युक्त चावल करीब 2000 क्विंटल आया था। उसकी का वितरण हो रहा है। इसकी थोड़ी मात्रा अब भी गोदाम में है।