शक्तिनगर। एनटीपीसी विंध्याचल में वैश्विक महामारी के बीच कर्मचारियों एवं उनके परिवारजनों की नीरसता को जीवंतता प्रदान करने के उद्देश्य से एक काव्य गोष्ठी हुइ्र। सोशल डिस्टेसिंग को ध्यान में रखकर काव्य गोष्ठी हाईटेक व्यवस्था के तहत लाइव टेलीकास्ट के जरिए आयोजित की गई। महाप्रबंधक (मानव-संसाधन) उत्तम लाल ने उद्घाटन भाषण दिया। गोष्ठी का संचालन कवि योगेंद्र मिश्रा ने किया। कवि योगेंद्र मिश्र ने फूल बहुत है पत्थर कम है, देश साथ है फिर क्या गम है। बड़ी जंग है बड़ा हौसला, हमसे तुम हो, तुमसे हम है‘‘ आदि विभिन्न प्रस्तुतियों से लोगों का दिल जीत लिया।
शुभारंभ वरिष्ठ प्रबंधक (एनटीपीसी मेजा) मुरली मनोहर श्रीवास्तव के सरस्वती वंदना हे मां वाणी में ओज दो की प्रस्तुति से हुई। सहायक प्रबंधक (मानव संसाधन) नेहरू शताब्दी चिकित्सालय जयंत कोरल वर्मा ने अपनी कविता वक्त के खजाने से थोड़ा वक्त मिल भी जाए, तो क्या है इतनी ताकत की वो मुझे अतीत में ले जाए को सुनाकर सभी को भाव विभोर कर दिया।
एसडीओ फॉरेस्ट रेणुकूट मनमोहन मिश्रा ने जो मेरे गीतों का एक-एक पेज है, दर्द का मेरे वो दस्तावेज है गजल सुनाया। डॉ. धर्म प्रकाश मिश्र प्रोफेसर संपूर्णानंद विश्वविद्यालय वाराणसी नें कोरोना महामारी पर कविता सुनाया। वाराणसी के नागेश शांडिल्य ने कोरोना पर अपनी कविता देखता हूँ जब कभी अपनी हंथेली सुनाया। मऊ के पंकज प्रखर नें घनघोर तिमिर को भेद यहां, नवगीतों का स्वर छं्द बनो! हे भारत के युवा सिपाही, उठो विवेकानंद बनो को सुनाकर सबकी वाहवाही लूटी। अपर महाप्रबंधक एनटीपीसी झज्जर डीसी शर्मा, मुरली मनोहर श्रीवास्तव, डॉ. ईश्वरचंद त्रिपाठी महाप्रबंधक (प्रचालन) अनिल कुमार ने एक से बढ़कर एक कविता सुनाई। कर दिया। कार्यक्रम के समापन पर महाप्रबंधक (मानव संसाधन) उत्तम लाल ने सभी कवियों की रचनाओं को सराहा। संचालन सहायक प्रबंधक (मानव संसाधन) एलएम पांडेय ने किया।