पहले मौसम, अब आग की उठती लपटों ने किसानों की उम्मीदों को जलाकर राख करना शुरू कर दिया है। हर दिन कहीं किसी का खेत तो किसी का खलिहान फूंक रहा है।
आशियानों में लगती आग अलग हायतौबा मचाए हुए है। अगिभनशमन के अपर्याप्त इंतजाम पहले से ही स्थिति को विस्फोटक रूप दिए हुए हैं। इसके चलते जहां किसानों पर कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा है।
वहीं पारिवारिक जिम्मेदारियां उन्हें अवसाद में डालने लगी है। ऐसे में समय रहते आग पर नियंत्रण को प्रभावी इंतजाम नहीं हुए तो तमाम किसानों और ग्रामीणों के समक्ष फाकाकशी की स्थिति सामने आ सकती है।
पिछले तीन दिनों से आग कुछ ज्यादा ही कहर बरपाए हुए है। गुरुवार को घोरावल क्षेत्र के कोहरथा में लगी आग ने दो बीघे, चोपन क्षेत्र के पथरहा में सात बीघे फसल जलकर राख हो गई।
रायपुर क्षेत्र के पड़री में सुखदेव के आशियाने का आधा से अधिक हिस्सा आग की भेंट चढ़ गया। घरेलू सामान फुंकने के साथ ही दो मवेशियों की जलकर मौत हो गई।
बीजपुर क्षेत्र के नेमना में भी शिवप्रसाद के घर लगी आग ने हजारों का सामान नष्ट कर दिया। शुक्रवार को भी घोरावल, राबर्ट्सगंज क्षेत्र के अमौली,
करमा क्षेत्र के डिलाही और दुद्धी क्षेत्र में लगी आग अग्निशमन विभाग को परेशान किए रही। उधर, भारतीय किसान संघ के काशी प्रांत अध्यक्ष चंद्रभूषण पांडेय का कहना है कि पहले मौसम, अब अगलगी किसानों की कमर तोड़ रही है।
तमाम किसानों के समक्ष भरणपोषण की समस्या उत्पन्न हो गई है। ऐसे में जिला प्रशासन को चाहिए कि अगलगी रोकने को पर्याप्त इंतजाम तो किए ही जाएं, प्रभावितों किसानों के मुआवजे का त्वरित निबटान किया जाए।
जिला अग्निशमन अधिकारी सुरेश चंद्र भी स्थिति की गंभीरता को स्वीकारते हैं। कहते हैं कि जो संसाधन हैं, उसके जरिए आग को काबू करने की पूरी कोशिश है,
लेकिन कहीं व्यक्ति की लापरवाही तो कहीं हाइटेंशन तारों में स्पार्किंग फसलों को राख करने की वजह बन रही है। इसको देखते हुए किसानों को खुद से भी सजगता का परिचय देना होगा।