सोनभद्र। प्रदेश सरकार ने बृहस्पतिवार को बजट में विंध्य एक्सप्रेस वे के निर्माण की घोषणा की है। प्रयागराज से मिर्जापुर होते हुए सोनभद्र तक आने वाला यह जिले का पहला एक्सप्रेस वे होगा। इसके जरिए यूपी को झारखंड और छत्तीसगढ़ से बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। परिवहन सेवाओं के साथ ही औद्योगिक क्षेत्रों में माल ढुलाई में कच्चे माल की आपूर्ति में सहूलियत आएगी। जिले में विकास का पहिया तेजी से घूमेगा।
यूपी के अंतिम छोर पर स्थित सोनभद्र की सीमाएं चार राज्यों को जोड़ती हैं। इसमें भी बिहार और मप्र से आवागमन के कई मार्ग हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ और झारखंड की सीधी कनेक्टिविटी सोनभद्र से ही है। इन राज्यों से प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में सड़क मार्ग से कच्चे माल की ढुलाई और आपूर्ति के दौरान तमाम चुनौतियां सामने आती रही हैं। छोटे हाईवे और आबादी के बीच से गुजरने के दौरान वाहनों के दुर्घटनाग्रस्त होने, जाम में फंसने के कारण समय से आपूर्ति प्रभावित होती है। इसके मद्देनजर ही पीएम गति शक्ति योजना के तहत रेल सुविधाओं को बेहतर बनाया जा रहा है। एक्सप्रेस वे बनने से इसमें काफी सहूलियत आएगी।जिले से निकलने वाले गिट्टी, बालू, कोयला, राख, एल्यूमिनियम सहित अन्य उत्पादों को दूसरे शहरों तक पहुंचाना आसान होगा। इससे जिले में औद्योगिक विकास को नई दिशा मिलेगी। जिले में पिछड़ेपन के पीछे बेहतर कनेक्टिविटी का अभाव बड़ी वजह रही है। एक्सप्रेस वे से सफर आसान होने से यहां बाहरी पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने की भी उम्मीद है।
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दशकों से अटकी कनहर सिंचाई परियोजना को मिलेगी रफ्तार
सोनभद्र। पिछले साढ़े चार दशक से निर्माणाधीन कनहर सिंचाई परियोजना के लिए भी सरकार ने बजट में प्रावधान किया है। बजट के अभाव में इसका काम सुस्त पड़ा था। अब इसे गति मिलेगी। तीन राज्यों की सीमा पर बन रही इस परियोजना से साढ़े 35 हजार हेक्टेयर भूमि को सिंचाई के लिए पानी मिलना है।
कनहर सिंचाई परियोजना में मुख्य बांध का काम लगभग समाप्ति की ओर है। बांध के डूब क्षेत्र में आने वाले 11 गांवों के विस्थापित परिवारों को पैकेज वितरण और पुनर्वास के लिए लंबे समय से बजट की मांग की जाती रही है। पिछले साल अंतरिम बजट में सरकार ने 50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया था। इस धनराशि के अवमुक्त होने से पुनर्वास से जुड़ी समस्याओं को हल करने में सहूलियत मिली है। अब इस बार भी बजट में परियोजना को धन आवंटित हुआ है। इससे बांध से निकलने वाली दांई और बांई नहरों का काम आगे बढ़ेगा। कोन क्षेत्र में पानी पहुंचाने के लिए बन रहे जलसुंरग को भी पूरा करने में मदद मिलेगी। इस सुरंग का काम करीब 60 फीसदी तक पूरा हो चुका है।
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जनजातीय बहुल 176 गांवों में 18 विभाग मिलकर कराएंगे काम
सोनभद्र। देश के आदिवासी बहुल जिलों के लिए केंद्र सरकार ने धरती आबा जनजातीय उत्कर्ष अभियान शुरू किया है। प्रदेश सरकार ने इस योजना के तहत चयनित गांवों में 18 विभागों को मिलकर विकास कार्य कराने के लिए निर्देश दिए हैं। बजट में भी इसका जिक्र करते हुए जनजातीय बहुल गांवों के विकास को गति देने का प्रावधान किया गया है। जिले के 176 गांवों को इस योजना का लाभ मिलेगा।
जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत ऐसे गांवों को चुना गया है, जिसमें जनजातीय वर्ग की आबादी 50 फीसदी से अधिक है। पूरे प्रदेश के 26 जिलों से 517 राजस्व गांव चिह्नित किए गए हैं। इसमें सबसे ज्यादा 176 गांव सोनभद्र के हैं। इन गांवों में हर घर जल, प्रत्येक पात्र परिवार को आवास, शौचालय, बिजली, स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने के साथ उन्हें रोजगार उपलब्ध कराए जाने हैं। इसके लिए पंचायती राज, बिजली, स्वास्थ्य, बेसिक व माध्यमिक शिक्षा, बाल विकास, समाज कल्याण, कृषि, पर्यटन, मत्स्य, आपूर्ति, पशु पालन, पर्यटन, नेडा, कौशल विकास सहित कुल 18 विभाग सहयोग करेंगे। जिला समाज कल्याण अधिकारी रमाशंकर यादव ने बताया कि ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत चिह्नित गांवों में सभी विभागों का सहयोग लेकर प्राथमिकता से कार्य कराए जा रहे हैं। इससे जनजातीय बहुल गांवों का सर्वांगीण विकास होगा।
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