ओबरा। ऊर्जा मन्त्री के प्रभावी हस्तक्षेप और समस्याओं के समाधान सहित ऊर्जा निगमों में कार्य का बेहतर वातावरण बनाने के स्पष्ट आश्वासन के बाद बिजली इंजीनियरों/जूनियर इंजीनियर्स का चल रहा असहयोग आंदोलन समूहिक अवकाश पर जाने का आंदोलन शनिवार को स्थगित हो गया। ऊर्जा मन्त्री अरविंद कुमार शर्मा से सचिवालय में ऊर्जा मंत्री के साथ उप्र राज्य विद्युत परिषद अभियन्ता संघ व जूनियर इंजीनियर संगठन के प्रतिनिधियों के बीच हुई विस्तृत वार्ता के बाद संगठनों ने ऊर्जा मन्त्री के आश्वासन पर पूर्ण विश्वास व्यक्त करते हुए आन्दोलन स्थगित करने का निर्णय लिया। संगठनों के प्रतिनिधियों ने ऊर्जा निगमों के शीर्ष प्रबंधन के तानाशाही पूर्ण दमनात्मक रवैये, शीर्ष स्तर पर भ्रष्टाचार और ऊर्जा निगमों में व्याप्त भय के वातावरण के बारे में विस्तार से बिन्दुवार ऊर्जा मन्त्री को अवगत कराया और उन्हें सभी मुद्दों पर लिखित ज्ञापन दिया।
ऊर्जा मन्त्री अरविंद कुमार शर्मा ने संगठनों के प्रतिनिधियों को आश्वस्त किया कि बिजली व्यवस्था में सुधार हेतु सभी संगठनों का सहयोग लिया जायेगा। यह भी निर्देश जारी किए कि संगठनों द्वारा उठाये गये भ्रष्टाचार के मामलों विशेषतया ईआरपी घोटाला, स्मार्ट मीटर खरीद, सबसे सस्ती बिजली देने वाले उत्पादन निगम को कोयला खरीदने के लिए धनराशि न देना और बाजार से 21 रु प्रति यूनिट की बिजली खरीदना, बड़ी संख्या में सलाहकारों की नियुक्ति आदि पर ऊर्जा निगमों का प्रबंधन लिखित टिप्पणी दे जिससे इस पर कार्यवाही की जा सके। उत्पीड़नात्मक अन्य कार्यवाहियों और सेवा शर्तों में प्रतिगामी संशोधनों के समाधान हेतु ऊर्जा मंत्री ने संगठनों को स्पष्ट आश्वासन दिया। वार्ता में प्रबन्धन की ओर से पॉवर कारपोरेशन के प्रबंध निदेशक पंकज कुमार और निदेशक कार्मिक एके पुरवार तथा संघ/संगठन की ओर से इं. शैलेन्द्र दुबे, इं. पल्लब मुकर्जी, इं. जीबी पटेल ,इं. प्रभात सिंह, इं. जय प्रकाश, इं. अदालत वर्मा, इं. आलोक कुमार श्रीवास्तव, इं. दिनेश कुमार प्रजापति आदि शामिल रहे।