शक्तिनगर में प्रदर्शनकारियों से बात करते एनटीपीसी के अफसर व प्रभारी निरीक्षक।
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शक्तिनगर। शनिवार को क्षेत्रीय लोगों द्वारा जोरदार प्रदर्शन के बाद शर्तों के साथ आठ अक्तूबर से पावर प्रोजेक्ट के आवासीय परिसर का ऊर्जाद्वार खोले जाने पर सहमति बन गई। व्यापारियों, क्षेत्रीय लोगों व सभी राजनीतिक दलों के संयुक्त विरोध के बाद दबाव में आए पावर प्रबंधन के अफसरों ने गेट खोलने का ऐलान किया। इसके बाद मामला शांत हुआ।
पावर प्रोजेक्ट के आवासीय परिसर के प्रवेश द्वारों को खोले व बंद किए जाने को लेकर विवाद कोई नया नहीं है। इस बार कोरोना काल के शुरुआत में बंद किए गए ऊर्जाद्वार का मामला है। बताते चलें कि आवासीय परिसर में अस्पताल, स्कूल, बैंक, शापिंग कांप्लेक्स, मेडिकल स्टोर सहित अन्य जरूरत की सुविधाएं मौजूद हैं। पावर प्रबंधन पहले सुरक्षा कारणों का हवाला देकर एक गेट को बंद कर दिया। इसके बाद दूसरे को फिर क्रम चल पड़ा। इस बीच कोरोना महामारी का दौर शुरू हुआ तो प्रबंधन एक गेट (नायक द्वार) को छोड़ सभी गेट बंद कर दिए। ऊर्जा व नायक द्वार के परिसर का मुख्य गेट माना जाता है। इस वजह से हो रही दिक्कतों से क्षेत्रीय लोग दो चार होते रहे।
शनिवार को पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत व्यापारी, आमजन, राजनीतिक दलों के नुमाइंदे नायक द्वार पर जमा हुए और धरना के बाद प्रदर्शन शुरू कर दिया। जानकारी के बाद प्रभारी निरीक्षक मिथिलेश मिश्रा पहुंचे और आंदोलनकारियों से बात की। इसके बाद पावर प्रबंधन के अफसर भी मौके पर पहुंचे। वार्ता के दौरान अधिकारियों ने आठ अक्तूबर से शर्तों के साथ ऊर्जाद्वार से आवाजाही की अनुमति देने का ऐलान किया तब मामला शांत हुआ। प्रभारी निरीक्षक मिथिलेश मिश्रा ने बताया कि दोनों पक्षों में ऊर्जाद्वार को खोले जाने को लेकर सहमति बन गई है। प्रबंधन शर्तों के साथ आठ अक्तूबर से गेट खोलने पर राजी हो गया है। धरना प्रदर्शन व वार्ता के दौरान अनिल सिंह गौतम, प्रशांत श्रीवास्तव, सत्यप्रकाश सिंह, बृजेश सिंह तोमर, रविंद्र यादव, शत्रुघ्न पांडेय, नंदलाल सहित सभी दलों के नेता व कार्यकर्ताओं के साथ काफी संख्या में क्षेत्रीय लोग मौजूद रहे।