जिले के शहरी एवं ग्रामीण इलाकों में सुचारू रूप से बिजली आपूर्ति करने में बिजली निगम सितंबर माह में फिसड्डी साबित हुआ है। शहरी एवं ग्रामीण इलाकों में बिजली आपूर्ति में अगस्त माह में ए प्लस रैंकिंग पाने वाला बिजली निगम सितंबर माह में डी रैंकिंग पर आ गया।
इसी तरह निर्माण कार्यों में लेटलतीफी की वजह से आरईडी विभाग की भी रैंकिंग गिरी है। वहीं एनआरएलएम की दो माह से रैंकिंग में सुधार नहीं हुआ है। इस संबंध में तीनों विभागों से जवाब तलब किया गया है।
बिजली निगम को शहरी एवं ग्रामीण इलाकों में रोस्टर के अनुसार बिजली आपूर्ति का निर्देश है। मगर, बीते सितंबर माह में रोस्टर को दरकिनार करते हुए बिजली आपूर्ति की गई। अगस्त माह में सीएम डैश बोर्ड पर बिजली निगम की रैंकिंग में निगम को ए प्लस रैंकिंग मिली थी।
मगर, दूसरे माह में ही बिजली निगम की व्यवस्था लड़खड़ा गई और रैंकिंग डी ग्रेड पर पहुंच गई। इसी तरह ग्रामीण अभियंत्रण विभाग (आरईडी) को भवन निर्माण मामले में अगस्त माह में ए प्लस रैंकिंग मिली थी।
सितंबर माह में निर्माण कार्यों की प्रगति अच्छी नहीं होने से रैंकिंग खिसक कर डी रैंकिंग पर पहुंच गई। वहीं एनआरएलएम की रैंकिंग दो माह से खराब चल रही है। समूह की महिलाओं का समय से बैंकों से ऋण मुहैया नहीं होने पर अगस्त माह में ई रैंकिंग मिली थी।
सितंबर माह में भी रैंकिंग में सुधार नहीं हुआ। इस बार भी सीएम डैश बोर्ड में ई रैंकिंग मिली है। जिला प्रशासन की तरफ से खराब प्रगति पर तीनों विभागों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। क