रेणुकापार इलाके के लोग नदी का राख मिश्रित पानी पीने को मजबूर हैं। रेणु नदी में ओबरा परियोजना से निकलने वाली राख बहाई जाती है। इससे नदी का पानी दूषित हो गया है। ऐसे में दूषित पानी लोगों को बीमार बना सकता है।
रेणुका नदी के चकाड़ी, गुरुड़, निंगा, बगबैयसा, अरंगी, कडिय़ा, कासपानी, मैरादांड, लोहियाकुंड फफराकुंड, चैना में जलस्तर खिसकने से पेयजल संकट खड़ा हो गया है। चिलचिलाती गर्मी और धूप ने लोगों की दुश्वारियां और बढ़ा दी है। ऐसे में गला तर करने के लिए लोग रेणुका नदी का राख मिश्रित पानी पीने को विवश हैं। रेणुका बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक विश्वनाथ पांडेय, कन्हैया, मंगल, रामपति, दिनेश, पतिराज, शिवमंगल, हरी ने चेताया कि जल्द इन क्षेत्रों में टैंकर से पानी आपूर्ति नहीं की गई तो विरोध प्रदर्शन को बाध्य होंगे।
पनारी के सेक्रेटरी रामविलास ने बताया कि 20 हजार 298 की जनसंख्या पर क्षेत्र में कुल 376 हैंडपंप हैं। इनमें मरम्मत कराने के बाद करीब 350 काम कर रहे हैं। राहत के लिए टैंकर की भी व्यवस्था की जा रही है। जुगैल के सेक्रेटरी सुनील यादव के अनुसार तीस हजार की आबादी वाले जुगैल क्षेत्र में कुल 575 हैंडपंप हैं, जिसमें करीब 400 को मरम्मत कर और पाइप बढ़ाकर पानी निकाला जा रहा है।
परसोई के सेक्रेटरी छोटेलाल यादव के मुताबिक नौ हजार की जनसंख्या वाले परसोई क्षेत्र में कुल 185 में से 150 के आसपास हैंडपंप काम कर रहे हैं। बिजली की व्यवस्था न होने के नाते इन गांवों में सबमर्सिबल भी नहीं लग सकता। वहीं वरिष्ठ चिकित्सक डा. आर के गुप्ता कहते हैं कि दूषित पानी पीने से लोगों को टायफायड, कालरा, हेपेटाइटिस, पीलिया, डायरिया जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। ऐसे में लोग मौत के करीब भी पहुंच सकते हैं। उधर, जल निगम के एक्सईएन राकेश कुमार वंसल ने कहा कि रेणुकापार के इन गांवों में अभी तक टैंकर उपलब्ध कराने की रिपोर्ट नहीं मिली है।