सोनभद्र। होली नजदीक आने के साथ ही बाजारों में केमिकल युक्त रंग और अबीर-गुलाल की बिक्री धड़ल्ले से हो रही है। दुकानों पर विभिन्न प्रकार के रंग उपलब्ध हैं। सस्ता होने के चलते ज्यादातर लोग केमिकल युक्त रंग खरीदते है पर यह रंग होली के उमंग और उत्साह को बेरंग कर सकते हैं। स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक हो सकते हैं। इसलिए हर्बल रंगों से ही हर्षोल्लास के साथ होली मनाएं।
होली को लेकर बाजारों में चहल-पहल बढ़ गई है। अन्य दिनों की अपेक्षा शनिवार को बाजार में खरीदारों की भीड़ अच्छी रही। राबर्ट्सगंज नगर में जगह-जगह सजीं रंग, अबीर, गुलाल एवं पिचकारी की दुकानों पर फुटकर दुकानदारों के साथ-साथ आम उपभोक्ताओं की भीड़ जुटी रही। परचून व मिठाई की दुकानों पर भी खरीदारों की भीड़ रही। छोटे बच्चे अपने मन पसंद की पिचकारियां खरीदी। रंगों का त्योहार होली 29 मार्च दिन सोमवार को मनाई जाएगी। होली के दिन लोग सुबह रंग खेलने के बाद शाम को लोग अबीर-गुलाल से भी होली खेलते हैं। रंगों की मांग ज्यादा होने से और मुनाफ़ा कमाने के चक्कर में बाजार में केमिकल युक्त रंग उतार दिए गए हैं। कई रंगों को तो यह कहकर बेचा जा रहा है कि यह सबसे गाढ़ा और न छूटने वाला रंग है। यदि ऐसे रंग को आप किसी अपने को लगाते हैं तो इसे छुड़ाने में उसकी त्वचा खराब भी हो सकती है। भूल से यह केमिकल आंखों में चले गए तो आंखों को काफी नुकसान हो सकता है। कोशिश करनी चाहिए कि कम पर सही रंगों का ही प्रयोग करें। हर्बल रंग सबसे बेहतर है पर ये थोड़े महंगे होते हैं।
राबर्ट्सगंज मेन चौक पर अबीर, गुलाल और रंग की दुकान किए चंदन केशरी का कहना है कि कोरोना कॉल में हर्बल रंगों की मांग बढ़ी है। महामारी की वजह से पिछले साल की तुलना में इस साल हर्बल रंगों का दाम 10 प्रतिशत बढ़ा है। इस साल हर्बल रंग 200 रुपये में 10 ग्राम हर्बल रंग बिक रहा है। इससे कम दाम में हर्बल अबीर, गुलाल व रंग उपलब्ध हैं।
बाजार से खरीदें हर्बल रंग
अभी कोरोना का खतरा टला नहीं है। ऐसे में होली पर विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। डा.संजय कुमार सिंह ने बताया कि बाजार में बिक रहे अधिकांश रंगों और अबीर-गुलाल में कोई न कोई केमिकल जरूर रहता है, जिसे लगाने से त्वचा और श्वास संबंधी परेशानी हो सकती है। प्रयास करें कि होली खेलते समय हर्बल अबीर, गुलाल और रंगों का ही प्रयोग किया जाए। सस्ते व खराब रंगों का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
डा.संजय कुमार सिंह ने बताया कि होली खेलने से पहले त्वचा पर तेल लगाने से रंगों से होने वाले जलन व अन्य कुप्रभाव से बचा जा सकता है। इसके साथ ही शीघ्र रंग छुड़ाने के लिए डिटर्जेंट पाउडर का कत्तई इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। बल्कि ऐसे साबुन का चयन करें जिसमें ग्लिसरीन की मात्रा अधिक हो। इससे त्वचा खराब नहीं होगा।
खोवा और दूध के दाम में उछाल
सोनभद्र। होली के मद्देनजर मिठाई की दुकानों पर रेडिमेड गुझिया सज गई हैं। खोवे, सूजी से बनी इन गुझियों की खरीदारी भी शुरू हो गई है। इसके अलावा लोग अपने घरों में गुझिया बनाने के लिए खोवा की खरीदारी कर रहे हैं। मांग बढ़ने के साथ खोवा के भाव भी बढ़ने लगे हैं। ग्रामीण क्षेत्र में खोवा 200 से 220 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। जबकि राबर्ट्सगंज नगर में शनिवार को 250 रुपये प्रति किलो खोवा और पनीर बिका। इसी तरह दूध के दाम में भी उछाल आया है। दुुकानों में रेडिमेड गुझियां 150 से 250 रुपये प्रति किलो तक बिक रही हैं।
पूर्णिमा तिथि रहने तक करें होलिका दहन
जिले में कुल 1478 स्थानों पर स्थापित होलिका परंपरागत तरीके से आज जलाई जाएंगी। ज्योतिषाचार्य डा.एसएन तिवारी के मुताबिक 28 मार्च दिन रविवार की रात 12.39 बजे तक पूर्णिमा तिथि है। दिन में 1.33 बजे ही भद्रा समाप्त हो जा रहा है। इसके बाद भद्रा है ही नहीं। इसलिए सूर्यास्त से लेकर देर रात पूर्णिमा तिथि रहने तक होलिका जलाई जा सकती हैं। होलिका जलाने के दौरान पूर्व दिशा की तरफ मुंह रहना चाहिए। उधर शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं शनिवार से उबटन तैयार करने में जुट गई। महिला पुष्पा, सुमित्रा ने बताया कि सरसो भुनकर उसे पीसकर उबटन तैयार किया जा रहा है। होलिका जलने से पूर्व घर के सभी सदस्यों को उबटन लगाया जाएगा।