सोनभद्र। जिले में कौन सी जमीन कृषि, आवासीय, व्यवसायिक, औद्योगिक व अन्य श्रेणी की भूमि होगी, इसके निर्धारण का अधिकार अब जिलाधिकारी को दे दिया गया है। इस संबंध अपर मुख्य सचिव रेणुका कुमार की तरफ से प्रदेश के सभी मंडलायुक्तों को पत्र जारी किया गया है। जिसमें ग्राम पंचायतों व प्राधिकरणों में निहित भूमि के श्रेणी निर्धारण का अधिकार संबंधित जनपदों के जिलाधिकारियों को दिेए जाने की बात कही जा रही है। बताया जा रहा है कि इस एक तरफ जहां जमीन संबंधी विवादों के निस्तारण में तेजी आएगी, वहीं श्रेणी संबंधी विवाद के कारण अधर में लटकी पड़ी विकास परियोजनाओं को भी गति मिलेगी।
अपर मुख्य सचिव की तरफ से छह जुलाई को जारी पत्र में कहा गया है कि भूमि व वस्तुओं के पुनर्ग्रहण, लोक उपयोगिता की भूमि के श्रेणी निर्धारण में परिवर्तन व विनिमय कर उपलब्ध कराने की कार्रवाई अब जिलाधिकारी द्वारा की जाएगी। पत्र में यह भी कहा गया है कि लोक उपयोगिता की भूमि व वस्तुओं के पुनर्ग्रहण व श्रेणी परिवर्तन की शक्तियां उन दशाओं में जहां राज्य सरकार तथा भारत सरकार के किसी विभाग के लिए अपेक्षित हों, 40 लाख रुयये तक जिलाधिकारी और इससे अधिक की भूमि के विनिमय व श्रेणी परिवर्तन का कार्य मंडलायुक्त के स्तर से किया जाएगा। उधर, शासन स्तर से जारी इस पत्र के बाद उन विकास परियोजनाओं को गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है, जो श्रेणी परिवर्तन के अभाव में लटकी पड़ी हैं। इसके साथ ही अब सड़क, पार्क, बाढ़ क्षेत्र, कृषि भूमि, वाणिज्यिक व औद्योगिक आदि भूमि की श्रेणी परिवर्तन लोकहित में जिलाधिकारी के स्तर से किए जाने से विकास परियोजनाओं को गति मिलने की बात भी कही जा रही है। इसके अलावा जमीन संबंधी विवादों के निस्तारण में भी तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।