बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी राजीव सिंह को शासन ने निलंबित कर दिया है। उन पर फतेहपुर में तैनाती के दौरान अधीनस्थों से धनउगाही करने, भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने, महिला कर्मचारियों के मानसिक व शारीरिक उत्पीड़न जैसे गंभीर आरोप हैं। शासन ने उन्हें मंडलायुक्त कार्यालय विंध्याचल से संबद्ध किया है। आरोपों की विस्तृत जांच के लिए विभाग के अपर निदेशक वित्त को नामित किया गया है।
राजीव सिंह को करीब डेढ़ साल पहले सोनभद्र में तैनाती दी गई थी। इससे पहले वह फतेहपुर जिले में इसी पद पर सेवा दे रहे थे। उनके कामकाज को लेकर शासन में शिकायत की गई थी। आरोप है कि लोकसेवक के पद पर कार्यरत होने के बावजूद उनका आचरण ठीक नहीं था। वह अपने अधीनस्थ कर्मचारियों से उगाही करने के साथ ही भ्रष्टाचार को बढ़ावा देते हैं। विभागीय योजनाओं के संचालन में लापरवाही के आदी हैं। अन्य विभागों से भी उनका कोई समन्वय नहीं है। इससे बाल विकास विभाग के साथ ही स्वास्थ्य, शिक्षा सहित अन्य महत्वपूर्ण विभागों की प्रगति पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। जनप्रतिनिधियों, उच्चाधिकारियों के निर्देशों की अवहेलना करते हुए मनमाने ढंग से काम करते हैं।
शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए शासन ने राज्यपाल की स्वीकृति के बाद जिला कार्यक्रम अधिकारी राजीव सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के अपर निदेशक (वित्त) लखनऊ को जांच अधिकारी नामित किया है। संयुक्त सचिव अशोक कुमार तिवारी की ओर से जारी पत्र में उन्हें जांच पूरी होने तक विंध्याचल मंडल के आयुक्त कार्यालय से संबद्ध किया गया है। निलंबन अवधि में उन्हें जीवन निर्वाह भत्ते की धनराशि देय होगी, लेकिन इसके लिए उन्हें यह प्रमाण पत्र देना होगा कि उन्हें अन्य माध्यम से आय नहीं हो रही