सोनभद्र। जिले के सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में अपशिष्टों के निस्तारण के लिए गहरे पिट का निर्माण कराया जाना था लेकिन अब तक नहीं कराया जा सका है। प्रत्येक अस्पताल के लिए करीब 26 हजार रुपये आवंटित भी हो चुके हैं। लेकिन अब तक निर्माण न होने से अपशिष्ट इधर-उधर फेंके जा रहे हैं। इससे प्रदूषण फैल रहा है। जिले में कुल 46 सीएचसी पीएचसी पर यह निर्माण कराए जाने हैं। कहीं गड्ढा खोदा भी गया है तो जाली लगाकर महज कोरम की अदायगी की गई है।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से निकलने वाले अपशिष्टों को डिस्पोजल करने के लिए गहरा पिट का निर्माण कराया जाना है। स्वास्थ्य केंद्रों से निकलने वाले अपशिष्टों जैसे निडिल, सिरिंज, रुई समेत अन्य वेस्ट जो इधर-उधर फेंक दिए जाते हैं, जिससे गंदगी फैलती है। उनको एक स्थान पर रखने के लिए गहरा पिट का निर्माण होना है लेकिन ज्यादातर जगहों पर अब तक इसका निर्माण नहीं हो सका है। डिस्पोजल खुली जगहों पर फेंके जा रहे हैं। जिले में छह सीएचसी, दो पीएचसी, 37 नया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और एक संयुक्त चिकित्सालय अनपरा है।
इन सभी जगहों पर गहरा गड्ढा बनाया जाना था। इसका निर्माण हो जाने से अस्पतालों के जो अपशिष्ट बाहर फेंक दिए जाते थे उसको एक स्थान पर रखा जाएगा ताकि गंदगी न फैलने पाए। स्वास्थ्य कर्मियों को भी सहूलियत मिलेगी क्योंकि जो वेस्ट अस्पताल से निकलते थे उसे इधर-उधर न फेंककर गहरे पिट में रखेंगे। प्रत्येक पीएचसी के लिए 26817 की धनराशि आवंटित की गई है लेकिन अब तक कई जगहों पर निर्माण नहीं हुआ। सीएचसी बभनी, अतिरिक्त पीएचसी सतवहिनी में गड्ढा बना हुआ है। गड्ढा खोदकर जाली लगा दिए हैं। कोन में जमीन विवाद के चलते न तो गड्ढा खोदा गया और न ही अस्पताल की चहारदीवारी का ही निर्माण कराया जा सका। सलैयाडीह, अमवार समेत अन्य कई अस्पतालों में भी निर्माण नहीं हुआ है।
जल्द हो जाएगा निर्माण पूर्ण, चल रही है कवायद
स्वास्थ्य विभाग के निर्माण के नोडल प्रभारी डॉ. राघवेंद्र सिंह ने बताया कि तमाम जगहों पर गहरे पिट का निर्माण हो चुका है। कोन में जमीन का विवाद है। उसे जल्द निबटा लिया जाएगा। जहां कहीं अभी निर्माण नहीं हुआ है वहां जल्द कार्य पूर्ण करा दिया जाएगा। अस्पतालों के डिस्पोजल गड्ढों में ही डाले जाएंगे ताकि प्रदूषण न हो। जहां गहरा पिट नहीं बना है वहां अस्थायी गड्ढे में डिस्पोजल फेंके जाते हैं।