सोनभद्र। सरकारी विभागों में संबद्धता के खेल पर लगाम नहीं लग पा रही। शासन की सख्ती के बावजूद जिले में 15 से ज्यादा ग्राम विकास अधिकारी जुगाड़ के सहारे सोनभद्र में ड्यूटी कर रहे हैं, जबकि उनकी तैनाती बरेली, बलिया, कन्नौज, फर्रुखाबाद समेत अन्य जिलों में है। ये अधिकारी रहने वाले भी गैर जनपद के हैं। उनको सोनभद्र में किस आधार पर बार-बार संबद्धता दी जा रही है, यह सवाल चर्चा में है।
सूत्रों के अनुसार संजय सिंह द्वितीय (वर्तमान में निलंबित) की मूल तैनाती बलिया में है लेकिन वह करीब पौने तीन साल से सोनभद्र के घोरावल ब्लाॅक में संबद्ध हैं। इसी तरह कन्नौज में नियुक्त सुनील गुप्ता भी दो साल 10 माह से जिले के नगवां ब्लाक में जमे हुए हैं। रायबरेली में नियुक्त अवनीश कुमार सिंह दुद्धी ब्लाक में, उदय प्रताप सिंह नगवां ब्लाक में और रामबहादुर म्योरपुर ब्लाक में एक साल 10 माह से तैनात हैं। उन्नाव में नियुक्त नरेंद्र पटेल की चतरा ब्लाक में, औरैया में नियुक्त सुधीर सिंह की दुद्धी ब्लाक में, बहराइच में नियुक्त राहुल शशांक नगवां ब्लाक में, जौनपुर में नियुक्त विनय यादव की करमा ब्लाक में, फर्रुखाबाद में नियुक्त कुंवर यशपाल सिंह कीचतरा ब्लाक में 13 माह से तैनात हैं। बहराइच में नियुक्त प्रमोद कुमार, बरेली में नियुक्त श्यामाचरण की एक साल से घोरावल ब्लाक में तैनाती बनी हुई है। इसी तरह कानपुर देहात में नियुक्त विकास सिंह घोरावल ब्लाक में सात माह से, जौनपुर में नियुक्त राबिंस सिंह म्योरपुर ब्लाक में, मिर्जापुर में नियुक्त कृष्ण कुमार सिंह दुद्धी ब्लाक में लगभग छह महीने से संबद्ध हैं।
-
जारी होते हैं निर्देश, नहीं होता पालन
बताते चलें कि पंचायती राज विभाग में समय-समय पर संबद्धता व्यवस्था समाप्त करने के निर्देश जारी होते रहते हैं। बावजूद जिस तरह से संबद्धता के नाम पर महज सोनभद्र में 15 ग्राम पंचायत विकास अधिकारियों की तैनाती उच्च स्तर से सामने आई है उसने कई तरह के सवाल खड़े कर दिए हैं। इसी तरह छह माह की तैनाती वाले दो ग्राम पंचायत विकास अधिकारियों को लेकर पहला संबद्धता आदेश फरवरी में और उसी तरह का दूसरा आदेश महज चार महीने बाद जुलाई में जारी होने पर भी चर्चाएं हो रही हैं।
-
नियुक्ति पत्रावली मूल जिले में, जाती है सिर्फ योगदान आख्या
संबद्धता के आधार पर नौकरी करने वालों की नियुक्ति से जुड़ी पत्रावली मूल जिले में ही रहती है। उन्हें वेतन भी वहीं से जारी होता है, मगर संबद्धता वाले जिले से सिर्फ योगदान आख्या भेजी जाती है। ऐसे में तैनात कर्मचारियों के संबद्ध में कोई शिकायत या गड़बड़ी हो तो स्थानीय स्तर पर इसका पता भी नहीं चल पाता। वहीं कर्मचारी मनचाहे जिले और स्थान पर तैनाती लेकर मनमाफिक नौकरी करते हैं।
-
कोट-
इतनी संख्या में संबद्धता गंभीर मामला है। यह निदेशालय से जुड़ा मामला है। उच्चाधिकारियों को इससे अवगत कराया जाएगा। निवासी और नियुक्ति दोनों दूसरे जिलों में होने के बावजूद सोनभद्र में संबद्धता कराने के पीछे के कारणों की भी जांच कराई जाएगी। - एके सिंह, उप निदेशक पंचायती राज, मिर्जापुर।