जिले में अब तक डेंगू के 13 मरीज मिले हैं। इसमें एक डेंगू पीड़ित की दो दिन पहले मौत हो गई है। जिले में साल दर साल डेंगू के मामलों में बढ़ोतरी हो रही है। इस साल भी निजी अस्पतालों से लेकर सरकारी अस्पतालों में बुखार के मरीज बढ़ गए हैं।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार 13 डेंगू मरीज मिले हैं। विभाग एलाइजा जांच के बाद ही डेंगू का पुष्ट रोगी मानता है। जबकि संदिग्ध मरीजों का भी उपचार डेंगू की तरह होता है। निजी अस्पतालों में भी डेंगू के मरीज पहुंच रहे हैं। हालांकि अस्पताल रिपोर्ट विभाग को देने से बचते हैं।
रमपुरवा निवासी रामललित (62) को 22 अगस्त की शाम को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डाॅक्टर के अनुसार रामललित डेंगू का संदिग्ध मरीज था। जिसकी शनिवार की शाम उपचार के दौरान मौत हो गई। विभागीय आंकड़ों में इसे संदिग्ध डेंगू मरीज माना जा रहा है। हालांकि जिला मलेरिया विभाग के आंकड़े में इस मरीज का कोई जिक्र नहीं है।
डेंगू वार्ड में तैयारी अधूरी
जिला अस्पताल में डेंगू संदिग्ध मरीज को दूसरे तल पर सामान्य मरीजों के साथ भर्ती करने के मामले ने डेंगू से निपटने के सीएमओ कार्यालय और मेडिकल कॉलेज प्रबंधन के दावों की पोल खोल दी है। दावा है कि एमसीएच विंग में दस बेड का डेंगू वार्ड बना है। रविवार को पड़ताल में सामने आया कि डेंगू वार्ड निष्क्रिय पड़ा है। यहां कर्मचारियों की तैनाती नहीं की गई है। पांच बेड पर ही मच्छरदानी लगी है। हालांकि अन्य बेड पर कोई इंतजाम नहीं है। सभी बेड पर धूल की मोटी परत मौजूद है। तो कमरे से बदबू आ रही थी। पड़ताल के दौरान डेंगू वार्ड में दवा उपलब्ध नहीं मिली।