दुद्धी। छोटे कस्बों में अभावों के बीच पलने वाली बेटियां भी बड़ी सफलता हासिल कर सकती हैं। दुद्धी की प्रगति सिंह इसकी नजीर हैं। बचपन में मां के संघर्षों से मिली प्रेरणा के बाद प्रगति ने सिविल जज बनकर परिवार का सपना पूरा किया। वर्तमान में वह हापुड़ में तैनात हैं।
वर्ष 2006 में प्रगति जब 10वीं में पढ़ रही थीं, तभी पिता उदय की मृत्यु हो गई। बच्चों की अच्छी परवरिश के लिए मां ने घर से बाहर निकलने की ठानी। एक निजी अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाकर बच्चों को अच्छी शिक्षा देने में कोई कसर नहीं छोड़ी। घर में ट्यूशन भी दिया। प्रगति बताती हैं कि मां के इन संघर्षों को देखकर ही कुछ बनने की ठानी थी। कई बार मुश्किलें आईं, लेकिन हर बार मां के संघर्ष मेरे लिए प्रेरणा बने। उसी के दम पर न्यायिक सेवा में चयनित हुई। प्रगति का कहना है कि कोई भी महिला खुद को किसी से कमजाेर न समझे। बस पूरे मन से अपने लक्ष्य के लिए काम करे। संघर्षों के बाद ही सफलता मिलती है।
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घर ही नहीं, आज समाज की डोर भी नारी के हाथों में
दुद्धी। उन्नाव में अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के पद पर सेवा दे रहीं रुचि श्रीवास्तव भी दुद्धी कस्बे की रहने वाली हैं। छोटे कस्बे में रहने के बाद भी उनके सपने कभी छोटे नहीं हुए और न ही कभी चुनौती ने उनकी राह रोकी। शुरू से ही बड़ा लक्ष्य तय कर वह आगे बढ़ती रहीं और सफलता भी हासिल की। रुचि का कहना है कि आज घर ही नहीं समाज की डोर भी नारी के हाथों में है। आठ मार्च का दिन महिलाओं की समानता, सशक्तीकरण और समर्पण के प्रति आभार प्रकट करने का दिन है। मुझे गर्व है कि मैं एक ऐसे घर और समाज से वास्ता रखती हूं, जहां मुझे अपने फैसले लेने, अपनी उड़ान भरने और आत्मनिर्भर बनने की आजादी थी। एक सशक्त समाज के रूप में यह हम सब का दायित्व होना चाहिए कि हम प्रत्येक महिला को यथासंभव सम्मान दें। प्रण लें कि उन्हें अधिकारों की रक्षा करेंगे और उन्हें हर क्षेत्र में आगे बढ़ने का हौसला देंगे। अगर समाज में नारी सशक्त होगी तो वह मात्र घर तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि एक सशक्त संस्कृति और सभ्यता की निर्माता भी होगी।
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