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तालाब किनारे गई युवती को मगरमच्छ ने झपट्टा मार खींचा,मौत

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घोरावल कोतवाली क्षेत्र के पडवनिया गांव के तालाब में मगरमच्छ के हमले संजू की मौत-(फाइल फोटो) - फोटो : SONBHADRA
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घोरावल। कोतवाली क्षेत्र के पड़वनिया गांव में मंगलवार को तालाब के किनारे खड़ी एक युवती को मगरमच्छ ने अपना शिकार बना लिया। मगरमच्छ झपट्टा मारकर युवती को तालाब में खींच ले गया जिससे उसकी मौत हो गई। पुलिस ने ग्रामीणों के सहयोग से शव निकलवाया।
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पड़वनिया निवासी संजू (20) पुत्री रामविलास कोल मंगलवार की सुबह करीब आठ बजे घर से करीब 200 मीटर दूर तालाब के किनारे गई थी। तालाब किनारे नित्यक्रिया के दौरान तालाब से एक मगरमच्छ निकला और झपट्टा मारकर संजू को तालाब में खींच ले गया। संजू चीखने लगी। चीख सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे। शोर करने पर मगरमच्छ तालाब में संजू को छोड़कर दूसरे किनारे पर चला गया। संजू को तैरना नहीं आता था, जिससे वह तालाब में डूब गई। मौके पर ग्रामीणों की भीड़ जुट गई। जानकारी होने पर परिजन पहुंचे । ग्रामीणों ने संजू की तलाश शुरू की। करीब दो घंटे बाद तालाब के किनारे से करीब दस मीटर दूर शव मिला। संजू तीन बहनों व दो भाईयों में तीसरे नंबर पर थी। घटना की सूचना पर लेखपाल इंदुशेखर त्रिपाठी मौके पर पहुंचे और घटना की लिखा पढ़ी की।
इंस्पेक्टर क्राइम रमाकांत यादव ने बताया कि मगरमच्छ हमला कर संजू को पानी में खींच ले गया जिससे संजू की मौत हुई। पोस्टमार्टम के बाद शव को परिजनों के सुपुर्द किया जाएगा। तहसीलदार विकास पांडेय ने बताया कि पोस्टमार्टम के बाद उसके परिजनों को नियमानुसार मुआवजा राशि दिलाई जाएगी।
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इनसेट
कई गांवों के तालाबों में हैं मगरमच्छ
घोरावल। बेलन नदी और इससे जुड़े मुक्खा फाल के कुंड में बड़ी संख्या में मगरमच्छ रहते हैं। बेलन नदी से निकल कर तमाम मगरमच्छ आस पास के गांवों में तालाबों में डेरा जमाए हुए हैं जिससे खतरा बना रहता है। दो साल पहले तेंदुहार निवासी अमृतलाल यादव को गांव के ही तालाब किनारे शौच करते समय मगरमच्छ खींच कर पानी में ले जाने लगा। ग्रामीणों ने उसे मगरमच्छ के चंगुल से छुड़ाया था। जख्मी हुए अमृतलाल का लंबे समय तक उसका इलाज चला था। डेढ़ी गांव के तालाब में मगरमच्छ डेरा जमाए हुए हैं जो कई बकरियों, कुत्ते व अन्य मवेशियों को अपना निवाला बना चुके हैं। कुछ महीने पहले भरौली गांव में मछली पकड़ने के दौरान जाल में एक मगरमच्छ फंस गया था। वहीं परसौना, तेंदुहारए तेंदुआ, पड़वनिया समेत तमाम गांवों के तालाबों में मगरमच्छ मौजूद हैं।
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इनसेट
भोजन की तलाश में तालाबों में पहुंच रहे मगरमच्छ
घोरावल। वन्य जीव रक्षक नीटू शर्मा कहना है कि बेलन नदी मगरमच्छों का प्रमुख निवास है। हर साल दर्जनों मगरमच्छों को खेतों या मानव बस्ती में से पकड़कर मुक्खा फाल के दह में छोड़ा जाता है। ये मगरमच्छ अपने भोजन की तलाश में नदी से निकलकर दूसरे तालाबों में पहुंच जाते हैं। जमीन की अपेक्षा पानी में मगरमच्छ कई गुना शक्तिशाली होते हैं। वे पानी में रहने वाले छोटे जीवों को शिकार बनाते हैं। पानी के बाहर ये शिकार की तलाश में आते हैं। भूखे होने पर मगरमच्छ बड़े जीवों पर हमला करते हैं या गांव में घुस जाते हैं। वहीं गर्मियों में नदी सूखने पर मगरमच्छ मानव बस्तियों व खेतों में भी पहुंच जाते हैं। उन्होंने अपील की है कि जिन तालाबों में मगरमच्छ रहते हैं उसके किनारे ग्रामीण खासकर बच्चे न जाएं। आवश्यक होने पर सावधानीपूर्वक तालाब व नदी किनारे जाएं।
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