घोरावल। सोन नदी से बालू के अवैध खनन में संलिप्तता के आरोप में बृहस्पतिवार की देर रात दस लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया गया। इससे खनन माफियाओं में हड़कंप मचा हुआ है। यह कार्रवाई एसडीएम के नेतृत्व में राजस्व विभाग, खनन और पुलिस की शिल्पी व कोरट गांवों में औचक छापेमारी में अवैध खनन की पुष्टि के बाद की गई।
घोरावल तहसील क्षेत्र में सोन नदी से बालू के अवैध खनन, अवैध परिवहन व बड़े पैमाने पर अवैध व्यापार की शिकायतों के मद्देनजर प्रशासनिक टीम ने शिल्पी व कोरट गांवों में औचक छापेमारी की। एसडीएम विजय प्रकाश तिवारी के नेतृत्व में तहसीलदार सुरेश शुक्ला, खनिज सर्वेयर, प्रभारी निरीक्षक शिवकुमार मिश्रा, कानूनगो मटरूलाल, लेखपाल रामचरित्र, लेखपाल राजा मानसिंह की टीम ने पुलिस फोर्स के साथ बृहस्पतिवार को दिन भर सोन नदी के किनारे शिल्पी व कोरट गांवों में जांच पड़ताल की। प्रशासनिक टीम ने इस निरीक्षण में कोरट गांव में मौके पर बालू का अवैध खनन होना नहीं पाया जबकि शिल्पी गांव में सोन नदी किनारे अवैध खनन पाया गया। अधिकारियों ने जांच में आराजी नंबर 2489 घ में करीब 15 घन मीटर बालू का अवैध खनन होना पाया। यह रकबा मोहनलाल वगैरह-वगैरह के नाम दर्ज है। जांच के दौरान अधिकारियों को ग्रामीणों ने बताया कि घोरावल कोतवाली क्षेत्र के हिनौती निवासी रंजीत सिंह और घोरावल नगर निवासी कुलदीप यहां बालू का अवैध खनन करते हैं। इस मामले में बृहस्पतिवार देर रात खान निरीक्षक जीके दत्ता की तहरीर पर हिनौती निवासी रंजीत सिंह पुत्र बृज बहादुर सिंह, घोरावल नगर निवासी कुलदीप पुत्र कपूरचंद, शिल्पी निवासी मोहनलाल पुत्र बसंतलाल, रामबली, सियाराम, जगनरायन, मुन्ना पुत्रगण सुभगलाल, रामपति, रामलाल, छोटकऊ पुत्र शंखलाल ग्रामवासी के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।
खान विभाग माफियाओं को देता आया है प्रश्रय
सोनभद्र। शिल्पी और कोरट में अवैध बालू खनन लंबे समय से होते आया है। यहां आस पास के दबंग लोग सिंडिकेट बनाकर खनन कराते हैं। भारी संख्या में ट्रैक्टर ट्राली रात भर जंगल के रास्ते अवैध रूप से बालू का परिवहन करते हैं। इसकी शिकायत कई बार खान अधिकारी और सर्वेयर से की गई मगर कार्रवाई के नाम पर महज अब तक खानापूर्ति होते रही। चूंकि इस अवैध कारोबार में घोरावल क्षेत्र का रहने वाले जिला पंचायत का एक दबंग ठेकेदार, सत्ता पक्ष के लोगों के साथ घोरावल के रहने वाले दबंगों का एक पूरा सिंडिकेट काम करता है। इन लोगों का खनिज विभाग में उठना बैठना होता है। सर्वेयर के घरों तक आना जाना है। इस नाते अगर जिलाधिकारी और एसडीएम के स्तर पर छापेमार कार्रवाई होती है तो खान विभाग से यह सूचना लीक कर दी जाती है। जब तक टीम वहां पहुंचती है तब तक ट्रैक्टर ट्राली गायब हो जाते हैं। टीम को सिर्फ वहां बालू खोदे गड्ढे ही मिलते हैं।
पुलिसकर्मी को खनन माफियाओं ने दे दिया था धक्का
सोनभद्र। शिल्पी कोरट बालू साइट मध्यप्रदेश और यूपी के बार्डर के बीच में पड़ता है। यह रास्ता जंगलों से होकर होकर जाता है। ऐसे में जगह जगह चार पांच की संख्या में खनन माफिया गुर्गों को बैठा देते हैं। पिछले वर्ष अवैध खनन की शिकायत पर एसपी ने खान विभाग को बताए बिना जांच करने के लिए एक टीम भेजी थी। टीम मौके पर पहुंची तो सैकड़ों की संख्या में ट्रैक्टर ट्राली पर बालू लोड होते मिला। टीम में शामिल एक सिपाही वीडियो बनाने लगा तो खनन माफियाओं ने उसे धक्का दे दिया। इसके बाद ताबड़तोड़ कार्रवाई हुई मगर कुछ दिनों के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया। इस मामले में खनिज विभाग के साथ ही प्रशासन की काफी फजीहत हुई थी।