जिला जेल गुर्मा को खुुले करीब एक वर्ष बीत गया लेकिन अब भी मुलाकातियों के लिए कोई इंतजाम नहीं है। गर्मी की कड़ाके की धूप हो या फिर बारिश का मौसम। मुलाकातियों को बंदियों से मुलाकात के लिए जेल के बाहर ही खुले आसमान के नीचे अपनी बारी का इंतजार करना पड़ रहा है। इससे लोगों में खासी नाराजगी है।
जिला कारागार को चालू हुए करीब एक वर्ष बीतने के बावजूद यहां तमाम समस्याएं मुंह बाये खड़ी हैं। जेल में स्टाफ की समस्या तो है ही, अन्य तमाम समस्याएं भी लोगों के लिए परेशानी का सबब हैं। सोनभद्र की महिला बंदी अब भी मिर्जापुर के जिला जेल में बंद हैं। यहां से उनके परिजनों को मिलने के लिए मिर्जापुर ही जाना पड़ता है। गुर्मा में सोनभद्र का जिला जेल बना है। इसमें तमाम बंदी हैं लेकिन उनके परिवार वालों को भी उनसें मिलने में परेशानी झेलनी पड़ती है। वर्तमान में भीषण गर्मी है। पारा 40 के पार है। इसके बावजूद मुलाकातियों को कड़ी धूप में पेड़ की छांव के नीचे ही अपनी बारी का इंतजार मुलाकात के लिए करना पड़ता है। मुलाकातियों की सुविधा के लिए अब तक छाया शेड, शौचालय, शुद्ध पेयजल का इंतजाम नहीं है। इससे मुलाकातियों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। भाजपा के गुर्मा नगर प्रभारी शोभनाथ तिवारी का कहना है कि जेल प्रशासन को मुलाकातियों की सुविधाओं का भी इंतजाम करना चाहिए।
उधर डिप्टी जेलर अजय राय कहते हैं कि टीन शेड लगवाने के लिए उनके पास कोई प्रस्ताव नहीं है। वर्तमान में करीब छह सौ बंदी जेल में निरूद्घ हैं। बताया कि जेल में जैमर लगवाने की भी कोई व्यवस्था फिलहाल नहीं है।