एशिया के बड़े जलाशयों में शुमार गोविंद बल्लभ पंत सागर (रिहंद) जलाशय में गुजरात से आई कोलंबो क्वीन नामक नाव जल्द ही दिखेगी।
रिहंद में पहली बार उतरने वाले इस बड़ी नाव का प्रयोग मछली निकासी के निमित्त किया जाएगा।
रिहंद की मछली से यूपी सरकार को बड़ा राजस्व हासिल होता है। इसके लिए कई करोड़ का ठेका होता है।
मानव निर्मित एशिया की सबसे बड़ी झील के रूप में पहचान कायम करने वाले जलाशय की भौगोलिक बनावट और क्षेत्रफल कुछ इस तरह है कि अपेक्षा के मुताबिक मछलियों की निकासी संभव नहीं हो पाता।
इसको देखते हुए कई मीटर गहरे पानी से और हर हिस्से से मछली निकाली जा सके इसी के लिए यह नाव लाई गई है। 130 हार्स पावर के इंजन से चलने वाली इस नाव का वजन 20 टन से अधिक है।
करीब 45 फुट लंबाई और 18 फुट चौड़ाई वाली यह नाव अधिकतम 40 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से पानी दौड़ सकेगी। खास बात यह होगी कि यह कम से कम छह मीटर गहरे पानी में पड़ाव ले सकेगी।
इसके बाद इस नाव में आई मछलियों को छोटी नावों के जरिए बाहर लाया सकेगा। मत्स्य विभाग के लोगों का कहना है कि कि समुद्र व बड़े जलाशयों में प्रयोग की जाने वाली इस नाव पर लोग नौकाविहार का भी लुत्फ उठा सकते हैं,
शासन स्तर से अनुमति मिल जाए। मछलियों का ठेका लेने वाली कंपनी मेसर्स अमरनाथ के साइट इंचार्ज विनोद गिरि ने बताया कि गुजरात से अभियंताओं की टीम आ चुकी है।
नाव को पानी में उतारकर टेस्टिंग का काम कराया जा रहा है। होली बाद नाव को मछली निकालने के काम पर लगा
दिया जाएगा।