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न्याय पालिकाओं में बंद होनी चाहिए कॉलेजियम व्यवस्था

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मधुपुर। ग्राम पंचायत परही में राष्ट्रीय समानता दल ब्लाक कर्मा इकाई ने सरकार की नीतियां और जनता पर उसका प्रभाव विषय पर संवाद किया। प्रदेश अध्यक्ष संजय दीप ने कहा कि देश की अदालतों में जजों की नियुक्ति की प्रणाली कॉलेजियम व्यवस्था कहा जाता है। कॉलेजियम व्यवस्था के तहत सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के नेतृत्व में बनी वरिष्ठ जजों की समिति जजों के नाम तथा नियुक्ति का फैसला करती है। सुप्रीम कोर्ट तथा हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति तथा तबादलों का फैसला भी कॉलेजियम ही करता है। हाईकोर्ट के कौन से जज पदोन्नत होकर सुप्रीम कोर्ट जाएंगे यह फैसला भी कॉलेजियम ही करता है। जबकि कॉलेजियम व्यवस्था का उल्लेख न तो मूल संविधान में है और न ही उसके किसी संशोधन प्रावधान में है।
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उन्होंने कहा कि कॉलेजियम व्यवस्था पिछड़े, दलित, आदिवासी, बनवासी समाज को न्यायालयों में हिस्सेदारी से रोकता है और ये योग्य व विधि विद्वानों के साथ धोखा है। सामाजिक न्याय की अवधारणा के विरुद्ध है। न्याय पालिकाओं में कॉलेजियम व्यवस्था बंद होनी चाहिए। प्रवक्ता धर्मेंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि वर्तमान सरकार ने आंदोलनों को कुचला और भी बहुत कुछ किया लेकिन लोकतंत्र को कुचलने में सफल नहीं हुए। इस दौरान युवा प्रकोष्ठ के प्रदेश महासचिव डॉ. राकेश कुमार, ब्लाक अध्यक्ष शशि कुमार, जय सिंह पटेल, सुरेश कोल, धर्मराज कोल, जेम्सवाट प्रसाद, जयप्रकाश मौर्य, अवधेश मौर्य, प्रमोद यादव, राधे पनिका, मोहन कुशवाहा, मुर्रेनाथ, राजदेव मौर्य, राजेश मौर्य, राजेंद्र मौर्य, एडवोकेट राजेश, घनश्याम आदि रहे।
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