सोनभद्र। एमसीएच विंग से भर्ती मरीज को अपने निजी अस्पताल भेजने के मामले में जिस चिकित्सक के खिलाफ जांच के निर्देश दिए गए हैं, उसे पहले ही हटाने के लिए सीएमओ ने पत्र लिखा है। बावजूद इसके पीपीपी मोड पर संचालित अस्पताल के प्रबंधन ने इसमें कोई रुचि नहीं दिखाई। अब पूरे मामले में उनकी भूमिका भी जांच के घेरे में है।
जिला अस्पताल परिसर में निर्मित सौ बेड के मातृ शिशु इकाई का संचालन पीपीपी मॉडल पर एक संस्था करती है। यहां पहले भी दवा-उपचार को लेकर कई तरह की शिकायतें आती रही हैं। इस बार मामला तब गर्म हुआ, जब शिकायत डिप्टी सीएम तक पहुंची। सेमरी निवासी लवकुश ने पिछले दिनों कोतवाली पुलिस और सीएमओ को पत्र देकर आरोप लगाया था कि 24 सितंबर को उनकी भाभी ने एमसीएच विंग में बच्चे को जन्म दिया था। वहां तैनात बाल रोग विशेषज्ञ उन्हें गुमराह कर बच्चे को उपचार के लिए अपने निजी अस्पताल ले गए, जहां काफी अधिक रकम वसूली गई। पैसे की उगाही के लिए मरीज को लंबे समय तक रोककर रखा गया। घटना के करीब एक माह बाद उप मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने इस मामले में जांच कर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। सीएमओ से तीन दिन में रिपोर्ट मांगी है। जांच शुरू हुई तो एक और तथ्य सामने आया है। जिस चिकित्सक पर मरीज को अपने निजी अस्पताल ले जाने के आरोप लगे हैं, उसकी पहले भी कई शिकायतें रहीं हैं। इन्हीं कारणों से सीएमओ डॉ. अश्वनी कुमार ने एमसीएच विंग का संचालन करने वाली संस्था को चिकित्सक को हटाने के लिए पत्र लिखा था। सीएमओ के पत्र पर भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
मरीजों को निजी अस्पताल ले जाने को लेकर हो चुकी है मारपीट
सिर्फ एमसीएच विंग ही नहीं, जिला अस्पताल में भी भर्ती मरीजों को गुमराह कर निजी अस्पताल ले जाने के मामले पहले आ चुके हैं। इसे लेकर कुछ माह पूर्व बिचौलियों व एक निजी अस्पताल संचालक के बीच मारपीट भी हुई थी। अस्पताल प्रबंधन की सख्ती के बाद कुछ हद तक इस पर अंकुश लगा, मगर रात में फिर से बिचौलिये सक्रिय होने लगे हैं।
उप मुख्यमंत्री से प्राप्त निर्देशों के आधार पर मामले की जांच कराई जा रही है। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। आरोपी चिकित्सक को हटाने के लिए संबंधित फर्म को पहले ही पत्र लिखा गया था। -डॉ.अश्वनी कुमार, सीएमओ।