वर्ष 2009 में सीबीआई छापेमारी के बाद ध्वस्त हुआ कोयला माफिया का सिंडीकेट फिर सक्रिय है। बीना परिक्षेत्र के साथ ही सिंगरौली के बरगवां परिक्षेत्र स्थित कथित कोल डिपो में मालगाड़ी और खदानों में लोडिंग प्वाइंट से चोरी होने वाले कोयले को इकट्ठा कर उसे डीओ (निलामी वाले कोयले) के कागजों की आड़ में मंडी और नजदीकी ईट भट्ठों पर कोयला खपाए जाने की बात सुर्खियों में है। बुधवार को यह मामला रेल मंत्रालय के संज्ञान में पहुंचा तो कड़ी कार्रवाई के निर्देश जारी कर दिए गए। मुख्य सुरक्षा अधिकारी धनबाद एएन झा ने भी मंडल के सभी आरपीएफ एसओ को अलर्ट कर मालगाड़ियों और ट्रेनों की गहन चेकिंग और निगरानी के निर्देश दिए हैं।
जिले की एरिया में एनसीएल की चार और सीमा से सटे सिंगरौली में छह कोल परियोजनाएं स्थित हैं। यहां से रोजाना हजारों टन कोयला रेलवे रैक के जरिए विभिन्न परियोजनाओं को तो जाता ही है, नीलामी के जरिए भी कोयले की बिक्री की जाती है। बताते हैं कि रेल रैकों से जगह-जगह कोयला उतारने के साथ ही, यात्री ट्रेनों में भी कोयला रखकर विभिन्न हिस्सों में पहुंचाया जाता है। इसके बाद उसे एक जगह इकट्ठा कर नीलामी वाले कोयले के कागज के जरिए दूसरी जगह ले जाकर खपा दिया जाता है। 2009 में कोयला तस्करी का यह काला कारोबार राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया तो सीबीआई ने रेड डाल दी। दुल्लापाथर में माफिया द्वारा बनाए गए डिपो को ध्वस्त करने के साथ ही कई गिरफ्तार किए गए। पुलिस और रेलवे सुरक्षा से जुड़े कई नामों के भी संलिप्त होने की बात सामने आई। सीआे पिपरी अनिल सिंह का कहना है कि मैं बाहर हूं। लौटते ही इसकी जानकारी लूंगा। इसमें जो भी शामिल होंगे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। गौरतलब है कि रेलवे पुलिस सिर्फ उन्हीं मालगाड़ियों से होने वाली कोयला चोरी पर कार्रवाई कर सकती है जो सीधे रेलवे के जरिए एनसीएल को जाता है।