बभनी/कोन/वैनी। चार राज्यों से सटे जिले के सीमावर्ती इलाकों के अस्पताल बदहाल है। ज्यादातर केंद्रों पर शाम होते ही चिकित्सा सेवा ठप हो जाती है। ऐसे में मरीजों को लंबी दूरी तय कर जिला अस्पताल या अन्य निजी अस्पतालों की शरण लेनी पड़ती है। झारखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ की सीमा पर स्थित ब्लॉक सीएचसी का कुछ ऐसा ही हाल है। बुधवार की रात इन इलाकों की ब्लॉक सीएचसी पर कहीं ताला बंद मिला तो कहीं डॉक्टर-कर्मचारी नहीं थे। बभनी में डॉक्टर मौजूद रहे।
झारखंड बॉर्डर पर स्थित कोन सीएचसी बस कहने के लिए है। यहां सिर्फ एक डाॅक्टर व तीन कर्मचारियों की तैनाती है। दिन में तो जैसे-तैसे उपचार मिल जाता है, लेकिन शाम होने के बाद मरीज भगवान भरोसे हैं। ऐसे में इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को निजी अस्पताल या फिर 40 किमी दूर चोपन सीएचसी जाना पड़ता है। अस्पताल की इस व्यवस्था के कारण मरीज भी यहां आने से कतराते हैं। बुधवार की रात नौ बजे अस्पताल पर ताला लटकता रहा। बिहार सीमा पर स्थित नगवां ब्लॉक पर स्थित वैनी सीएचसी में भी रात्रिकालीन चिकित्सा व्यवस्था ध्वस्त है। बुधवार की रात साढ़े नौ बजे अस्पताल का गेट तो खुला था, मगर अंदर परिसर में सन्नाटा पसरा था। सभी कमरे अंदर से बंद रहे। मरीज बाहर से ही अस्पताल की स्थिति देख लौट जाते हैं। छत्तीसगढ़ सीमा से सटे विकास खंड बभनी में संचालित सीएचसी पर भी मरीजों के लिए सुविधाएं नहीं मिल पातीं। हालांकि बुधवार की रात स्थिति कुछ अलग थी। सीएचसी की इमरजेंसी में एक घायल युवक भर्ती मिला। वहीं सर्पदंश से पीड़ित चार वर्षीय बच्चे काे भी भर्ती किया गया था। इमरजेंसी में डाॅ. फिरोज आब्दीन, फार्मासिस्ट सुरेंद्र कुमार और सौरभ कुमार मौजूद थे। अस्पताल में एक्स रे या गंभीर मरीजों का उपचार करने की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में मरीजों को रेफर करना पड़ता है। रात्रि में प्रसव केंद्र में स्टाफ नर्स रजनी और एएनएम राजकेशरी दुबे ड्यूटी पर तैनात मिलीं। बुधवार को पूरे दिन से लेकर रात्रि 10 बजे तक कोई डिलीवरी नहीं हुई थी। सीएमओ डॉ. अश्वनी कुमार ने बताया कि कोन सीएचसी में सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ ही डॉक्टर-कर्मचारी की अतिरिक्त तैनाती के लिए प्रयास किया जा रहा है। जल्द ही व्यवस्था सुधरेगी।