सोनभद्र। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में लिपिक पद पर दो व्यक्तियों को नियुक्ति दिलाने के नाम पर 24 लाख रुपये ऐंठ लिए गए। दोनों को विद्यापीठ तक ले जाकर नियुक्ति पत्र थमा दिया गया। लेकिन जब वह ज्वाइन करने पहुंचे तो पता चला कि नौकरी का झांसा देकर उनसे रुपये ऐंठ लिए गए हैं। इसमें जिले के एक व्यक्ति के अलावा सचिवालय से जुड़े एक कथित कर्मचारी की भूमिका बताई जा रही है। पुलिस को इस मामले में तहरीर दे दी गई है।
सदर कोतवाली क्षेत्र के जमगाई गांव निवासी शंकर यादव ने तहरीर दी कि 2018 में उनसे एक व्यक्ति की मुलाकात हुई। उसने कहा कि मेरे एक मित्र हैं जो सचिवालय में उच्च शिक्षा विभाग में कर्मचारी है। अगर कोई आपका परिचित नौकरी करना चाहता है तो नौकरी लगवाई जा सकती है। इसके बाद उसके मित्र से सचिवालय के बाहर एक होटल में मुलाकात हुई। वहां पर उस मित्र ने बताया कि विश्वविद्यालयों में 84 लिपिक की पोस्ट पर नियुक्ति के लिए विज्ञापन निकला है। ऑनलाइन आवेदन करवा कर सभी अभिलेख की कॉपी मेरे पास भेज दिजिएगा। नियुक्ति के लिए जो रुपये लगेगा देना पड़ेगा। इसके बाद अलग-अलग तिथियों में करीब 22 लाख रुपये लिए गए। करीब डेढ़ लाख से अधिक की रकम भाग दौड़ के नाम पर ली गई। शंकर यादव ने बताया कि रुपये देने के बाद भी नौकरी नहीं लगी तब रुपये का तगादा शुरू कर दिया। उसे, उसके भाई और प्रमोद यादव को काशी विद्यापीठ वाराणसी ले जाया गया। वहां कार्यालय में कार्यभार ग्रहण प्रमाण दिला दिया गया। उस पर नियुक्ति प्राधिकारी का हस्ताक्षर और काशी विद्यापीठ की मुहर लगी थी। इसके बाद कहा गया कि सचिवालय से कुलपति के यहां पत्र आएगा। उसके बाद नियमित ड्यूटी करनी होगी। फिर एक फरवरी 2019 को काशी विद्यापीठ ले जाया गया जहां से चार फरवरी को उपस्थित होकर मूल पत्रावलियां दिखाने का पत्र थमाया गया। इसके बाद जब चार फरवरी को पहुंचे तो पता चला न कोई नियुक्ति का पद निकला है नहीं उन्हें पत्र अधिकारियों ने कोई पत्र जारी किया है। इस संबंध में कोतवाल अंजनी कुमार राय ने कहा कि अभी उनके समक्ष तहरीर नहीं आई है। जैसे ही तहरीर मिलती है जांच कर कार्रवाई की जाएगी।