टीम के साथ पहाड़ी पगडंडियों से होते हुए लगभग ढाई किमी की दूरी उन्होंने पैदल तय की। इसके बाद आगे का डेढ़ किमी सफर ट्रैक्टर-ट्राली के जरिए पूरा किया। गांव में पहुंचने पर न बिजली की सुविधा मिली और न ही पेयजल और स्वास्थ्य से जुडे़ इंतजाम थे।
कंपोजिट विद्यालय में बच्चों की अच्छी मौजूदगी थी, लेकिन अन्य सुविधाओं-संसाधनों के अभाव पर सीडीओ भी हतप्रभ रह गईं। इस दौरान जो भी बच्चे खसरे की चपेट में थे उन्हें जरूरी दवा-उपचार उपलब्ध कराने के साथ ही शेष बच्चों का टीकाकरण कराया गया।
ग्रामीणों को साफ-सफाई और रोगों से बचाव के लिए जरूरी हिदायतें दी गईं। जब तक गांव के लिए सड़क का निर्माण और स्वास्थ्य को लेकर स्थाई व्यवस्था नहीं हो जाती तब तक डॉक्टरों की एक टीम तिलहर गांव में रोस्टर वार चक्रमण-ग्रामीणों के चेकअप का कार्य जारी रखेगी।
सीएमओ को इस व्यवस्था को तत्काल प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए हैं। सड़क का निर्माण शीघ्र शुरू हो सके इसके लिए पीडब्ल्यूडी महकमे को वन विभाग से समन्वय बनाते हुए जल्द एनओसी हासिल करने के लिए कहा गया है।
वन विभाग की अड़ंगेबाजी पर हुईं नाराज
सीडीओ ने सड़क निर्माण न होने को लेकर पीडब्ल्यूडी से जानकारी मांगी तो बताया गया कि तीन साल पहले ही सड़क निर्माण की स्वीकृति मिल गई है लेकिन अब तक वन विभाग की एनओसी नहीं मिल पाई है। विद्युतीकरण का कार्य न होने के पीछे भी वन विभाग की अड़ंगेबाजी सामने आई।