अध्ययन की नई कवायद को लेकर सिंगरौली प्रदूषण मुक्ति वाहिनी की तरफ से एनजीटी में दाखिल की गई याचिका में कहा गया है कि इस अध्ययन में भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की तरफ से मानव प्रतिभागियों से जुड़े जैव चिकित्सा अनुसंधान और स्वास्थ्य अनुसंधान के लिए वर्ष 2017 में नैतिक दिशानिर्देश तैयार किए गए हैं, उसका खास ख्याल रखा जाए।
प्रदूषण के दुष्प्रभावों का अध्ययन नैतिक मानकों के अनुसार, पूर्ण पारदर्शिता के साथ, और प्रभावित समुदाय की सक्रिय भागीदारी के साथ किया जाए। अगर भविष्य में राज्य प्राधिकारियों की ओर से प्रभावित क्षेत्र का कोई संयुक्त निरीक्षण करने की योजना बनाई जाती है तो सिंगरौली प्रदूषण मुक्ति वाहिनी के एक प्रतिनिधि को भी उसमें शामिल किया जाए।
मांगों पर नहीं जताई गई कोई आपत्ति
पिछले सप्ताह इस मसले पर एनजीटी के चेयरमैन न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव की बेंच ने सुनवाई की। शनिवार को सामने आए निर्णय में एनजीटी की प्रधान पीठ की तरफ से कहा गया कि राज्य सरकार की तरफ से इसका कोई विरोध नहीं किया गया है। यह बताया गया है कि एम्स भोपाल प्रभावित क्षेत्र के अध्ययन में शामिल है। इसलिए एम्स भोपाल से जैसे ही रिपोर्ट प्राप्त होते ही राज्य प्राधिकारी उसे न्यायाधिकरण के समक्ष प्रस्तुत करें।
क्या बोले अधिकारी
एम्स भोपाल की टीम सोनभद्र में प्रदूषण के दुष्प्रभाव के व्यापक अध्ययन में जुटी हुई है। अक्तूबर तक अध्ययन कार्य पूरा कर लिया जाएगा। - आरके सिंह, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी, यूपीपीसीबी