किसी ने ठीक ही लिखा है कि मायूस होकर यूं आंगन से न उखाड़ो पौधे, धूप बरसी है तो बारिश भी यहीं होगी...। नक्सल प्रभावित जनपद के दो होनहार भाइयों पर यह लाइनें सटीक बैठती हैं।
दोनों सहोदर भाइयों ने एक साथ इंडियन मिलेट्री एकेडमी में पहुंचकर न सिर्फ जिले का नाम रोशन किया है, बल्कि एक साथ ट्रेनिंग क्वालीफाई कर सैन्य अफसर (लेफ्टिनेंट) बनकर मां बाप के अरमानों को भी नई उड़ान दी।
बता दें कि देश के लिए कुछ कर गुजरने की जज्बा लिए सगे भाइयों विकास और राहुल तिवारी ने निजी क्षेत्र में भारी भरकम पैकेज को छोड़कर राष्ट्रभक्ति की राह चुनी। दोनों भाइयों की सफलता पर जनपद वासियों को नाज है।
रेणुसागर की गलियों में पले-पढ़े विकास-राहुल कुछ ऐसा कर दिखाएंगे, किसी ने सोचा भी नहीं था। हिण्डालको रेणुसागर पावर डिवीजन के संचालन विभाग में बतौर कर्मी तैनात बेचन प्रसाद तिवारी के दोनाें लाडलों ने इंटर तक की शिक्षा-दीक्षा आदित्य बिड़ला पब्लिक स्कूल रेणुसागर से पूरी की।
बड़े पुत्र विकास ने इंटर के बाद इलाहाबाद से बीटेक की पढ़ाई कर आईएमए (इंडियन मिलिट्री एकेडमी) देहरादून में दाखिला लिया। वहीं छोटे पुत्र राहुल ने इंटर के बाद कबांइड डिफेंस सर्विसेज एग्जाम के माध्यम से सैन्य एकादमी देहरादून में इंट्री पाई।
उम्र में तीन वर्ष का अंतर होने के बावजूद दोनों ने अलग-अलग माध्यमों से एक साथ आईएमए में दाखिला लेकर छोटे-बड़े का अंतर तो मिटाया ही, एक साथ लेफ्टिेनेंट बनकर परिवार के लोगों के साथ ही ऊर्जांचल के लोगों को भी इतराने का मौका दे दिया।
विकास की पहली पोस्टिंग जालंधर में तो छोटे भाई राहुल की पुणे में हुई है। दोनों का कहना था कि अब देश के लिए मर-मिटना ही उनका उद्देश्य है।
उधर, रेणुपावर डिवीजन के मुखिया आरके गुप्ता ने इस पर प्रसन्नता जताई है और दोनों भाइयों को नजीर बताते हुए दूसरों को भी इससे प्रेरणा लेने की सीख दी है।