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निजीकरण के विरोध में कार्य बहिष्कार

Tue, 27 Mar 2018 11:08 PM IST
अमर उजाला ब्यूराो/सोनभद्र
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सोनभद्र। बिजली के निजीकरण के विरोध में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष व यूपी राज्य विद्युत परिषद इंजीनियर संगठन ने संयुक्त रूप से मंगलवार को कार्य बहिष्कार किया। अधीक्षण अभियंता कार्यालय पर धरना दिया और प्रदेश सरकार के नीतियों का विरोध किया। चेताया कि यदि सरकार निजीकरण का फैसला वापस नहीं लेती है तो अगले चरण का आंदोलन तेज होगा।
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यहां एसई सुभाष चंद यादव ने कहा कि निजीकरण का निर्णय विद्युत सेक्टर को वित्तीय रूप से स्वावलंबी बनाने, लाइन हानियां कम करने एवं विद्युत आपूर्ति की गुणवत्ता में सुधार किये जाने का बहाना बनाया गया है। एक्सईएन राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि पिछले एक वर्ष में विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों की कड़ी मेहनत की बदौतल बढ़े हुए घंटों के साथ गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति, समय से खराब परिवर्तकों का प्रतिस्थापन, अत्यधिक मात्रा में नये संयोजनों का निर्गमन के साथ-साथ ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में होने वाली विद्युत दुर्घटनाओं में काफी कमी लायी गयी है।


बड़े सुधार हुए हैं लेकिन सरकार गलत निर्णय ले रही है। एसडीओ अनिल कुमार ने कहा कि आगरा शहर की विद्युत व्यवस्था को निजी क्षेत्र के टोरंट पावर को पूर्व में दिया जा चुका है। उसकी खराब कार्यप्रणाली से पावर कारपोरेशन को प्रतिवर्ष सैकड़ों करोड़ रूपये की वित्तीय हानि उठानी पड़ रही है। विद्युत उपभोक्ताओं का लगातार उत्पीड़न बढ़ता जा रहा है। एसडीओ अजय सिंह ने कहा कि विद्युत व्यवस्था को निजी क्षेत्र में सौंपने से प्रदेश के युवाओं को मिलने वाली करीब तीन हजार स्थाई नौकरियों के अवसर खत्म हो जाएंगे। सपा के जिलाध्यक्ष विजय यादव ने कहा कि यूपी सरकार हर मोर्चे पर फेल है। संचालन पंचधारी सिंह ने किया। यहां सरोज कुमार, लक्ष्मी शंकर, चंद्र शेखर, विरेश सिंह, एसके सिंह, अक्षय कुमार यादव, अरविंद कुमार मौजूद रहे।
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ओबरा। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के नेतृत्व में मंगलवार को स्थानीय ओबरा तापीय परियोजना के बीटीपीएस झरियानाला गेट पर्र अभियंता व बिजली कर्मचारियों ने कार्य बहिष्कार व विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान विभिन्न संगठनों से जुड़े पदाधिकारियों ने प्रदेश सरकार व पावर कारपोरेशन प्रबंधन पर हठधर्मिता का आरोप लगाते हुए नारेबाजी की। चेताया कि यदि निजीकरण का निर्णय वापस नहीं हुआ तो आंदोलन किया जाएगा। यहां वक्ताओं ने कहा कि प्रदेश सरकार व प्रबंधन निजीकरण को लेकर अनावश्यक टकराव का वातावरण बना रही है।


यदि सरकार अपना हठवादी रवैया नहीं छोड़ती है और निजीकरण के फैसले पर पुनर्विचार नहीं करती है तो आंदोलन में विद्युत उत्पादन 765 और 400 केवी विद्युत उपकेंद्र तथा प्रणाली नियंत्रण की पाली में काम करने वाले अभियंताओं व कर्मचारियों को शामिल करते हुए अनिश्चितकालीन आंदोलन किया जाएगा। ऊर्जा क्षेत्र में व्यापक सुधार के लिये गुजरात मॉडल लागू हो। वक्ताओं ने कहा कि यूपी सरकार ने टोरेंट पावर का उदाहरण लेकर जो निजीकरण की पहल की गयी है वह पूरी तरह गलत है।


विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 14 के तहत बिना नियामक आयोग की अनुमति के कैबिनेट का लिया फैसला पूरी तरह संवैधानिक नहीं है। कंपनीवार बिजली कंपनियों के कुल करीब 10323 करोड़ सरकारी विभागों के बकाये पर अभियंता संघ के क्षेत्रीय सचिव इं. अदालत वर्मा ने कहा कि वास्तव में सरकार यदि फ्रेंचाइजी देना चाहती है तो वह सरकारी विभागों के बकाये को वसूलने के लिये फ्रेंचाइजी दे सकती है।


प्रांतीय नेता अजय सिंह ने कहा कि मुनाफे के निजीकरण व घाटे के राष्ट्रीयकरण की प्रदेश सरकार की नीति है जो जनहित में नहीं है। सभा को इं. बीएन सिंह, पारस नाथ सिंह, सत्य प्रकाश सिंह, दिनेश यादव, अजय सिंह, राधामोहन प्रजापति, आरके शुक्ला, एनसी त्रिपाठी, शशिकांत श्रीवास्तव, दीपक कुमार सिंह, शाहिद अख्तर ने संबोधित किया। अध्यक्षता बीडी विश्वकर्मा, संचालन सुनील पवार ने किया।
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