ऊर्जांचल में सीबीआई टीम की छापेमारी के बाद भी कोयले की चोरी धड़ल्ले के साथ जारी है। यहां से रात के अंधेरे में कई टन कोयला किसी न किसी से माध्यम से चंधासी मंडी तक ले जाया जा रहा र्है।
इंट भट्ठों और होटलों पर भी चोरी का कोयला बेचे जाने की बात सुर्खियों में है। दिलचस्प बात यह है कि माह भर पूर्व बीना में हुई बैठक में एसडीएम की ओर से बिना तिरपाल
ढंकी ट्रकों से कोयला चोरी होने की बात संज्ञान में आने की बात स्वीकारी जा चुकी है और उनके स्तर से आला अधिकारियों को जानकारी देने के साथ ही थानाध्यक्षों को अंकुश के लिए निर्देशित किया जा चुका है। बावजूद इस काले धंधे पर अंकुश दूर की कौड़ी बनी हुई है।
बताते हैं कि रात में कोल परियोजनाओं के सीएचसी प्वाइंट, बांसी में आने वाली कोयला रैक के साथ ही खुले ट्रकों से होते कोयला परिवहन से कई टन कोयला चुराकर खड़िया, रेहटा, बांसी आदि जगहों पर इकट्ठा कर लिया जाता है।
इसी तरह ओवर वर्डेन वाले हिस्से भी कोयला बिनवाकर रेहटा और खड़िया में इकट्टा करवाते हैं। इस काम में महिलाओं और साइकल सवारों को लगाया गया है।
सूत्रों की मानें तो यहां इकट्ठा किए जाने वाले कोयले को पिकअप में भरकर पिपरी क्षेत्र के गाढ़ा बैरियर के पास वाले इलाके में ले जाया जाता है।
वहां से ट्रक पर कोयला लादकर चंधासी या अन्य गंतव्य स्थान तक पहुंचाया जाता है। ऊर्जांचल से हर रात 10 से 15 पिकअप कोयला ले जाए जाने की बात बताई जा रही है।
खुले ट्रकों से डिबुलगंज के आगे जंगल में कोयला उतारा जाता है, सो अलग, सूत्रों की बातों पर भरोसा करें तो इस खेल में कोल माफियाओं के साथ कई सफेदपोश शामिल हैं। सुरक्षा से जुड़े तंत्रों की भी भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं।