केंद्र सरकार के पांच सौ, एक हजार रुपये के नोट बंद करने के फैसले के बाद भूचाल सा आ गया है। उन तमाम लोगों के पैरों तले जमीन खिसक गई है, जिन्होंने काफी धन जमा कर रखा था। तमाम व्यापारियों ने मंगलवार की रात ही जमकर लेनदेन किया। अस्पतालों और पेट्रोल पंपों पर बड़ी नोट न लेने से लोगों की परेशानी बढ़ गई है। छोटे दूकानदार भी सरकार के इस फैसले से तत्कालिक रूप से प्रभावित हुए हैं।
मंगलवार को केंद्र सरकार का लिया फैसले से बुधवार को अधिकतर लोग परेशान दिखे। बच्चों से लेकर बड़े तक पांच सौ और एक हजार रुपये के नोट बंद होने की चर्चा करते रहे। लोग काला धन जमा करने और उसको जल्द जमा करने को लेकर भी एक दूसरे की चुटकी लेते रहे। नोटों के बंद होने से जनजीवन बुरी तरह से प्रभावित रहा। मंगलवार की रात प्रधानमंत्री का राष्ट्र के नाम संबोधन सुनने के बाद तमाम लोगों ने बकाएदारों को बुलाकर लाखों रुपये का कर्ज वापस किया। खनन और कोयला उद्योग का क्षेत्र होने के नाते काले कारोबारियों में अफरातफरी होने की चर्चा रही।
बुधवार की सुबह होते ही लोग पांच सौ और एक हजार रुपये का फुटकर कराने के चक्कर में पड़े लेकिन निराशा मिली। पेट्रोल पंपों में फुटकर में डीजल, पेट्रोल दिया ही नहीं गया। जो पांच सौ, एक हजार का नोट लेकर पहुंचे, उन्हें पूरे का तेल भराने को कहा गया। विवश होकर तमाम लोगों ने तेल भराए भी। अस्पतालों में भी स्थिति खराब रही। जिला मुख्यालय पर स्थित एक निजी अस्पताल में इलाज कराने झारखंड से आए एक परिवार को फुटकर की समस्या झेलनी पड़ी। हालांकि काफी कहने के बाद अस्पताल में मरीज का उपचार हो सका। बड़े नोटों के बंद होने से व्यापार प्रभावित हुआ। उधर बैंकों में ताले लटके रहे। जहां कहीं बैंकों के शटर खुले नजर आए वहां पूछताछ के लिए लोग पहुंचते रहे।