फौज के पूर्व अफसरों को सौंपी जाने वाली मिनीरत्न कंपनी एनसीएल की सुरक्षा इन दिनों सवालों के घेरे में है। निगाही में सीबीआई की छापेमारी के बाद जहां सभी कोल परियोजनाओं में हड़कंप की स्थिति है। सीबीआई टीम ने भी, एक पूर्व सैनिक की दूसरी जगह भी परेड कराकर कागजी कोरमपूर्ति कराने तो कई सामान्य व्यक्तियों को फर्जी दस्तावेज के जरिए पूर्व सैनिक बनाने की जांच तेज कर दी है। सूत्रों की मानें तो छापेमारी और हिरासत में लिए गए सुरक्षा अधिकारियों से पूछताछ में सीबीआई को कई अहम जानकारियां मिली हैं।
डायरेक्टर जनरल आफ रिसेटलमेंट (डीजीआर) योजना के जरिए पूर्व सैनिकों को सार्वजनिक उपक्रमों की सुरक्षा में नियोजित किया जाता है। इसी कड़ी में जून में एनसीएल में पंजीकृत अंबाला, राजस्थान, लखनऊ, भोपाल, गाजियाबाद, दिल्ली की सुरक्षा एजेंसियों को उनके बताए संख्या अनुसार अलग-अलग कोयला प्रोजेक्टों, कंपनी मुख्यालय के सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। बताते हैं कि कागजी कोरम पूर्ति के लिए एक पूर्व सैनिक को दूसरे परियोजनाओं के टाइम आफिसों में परेड कराकर कागजी कोरमपूर्ति कर ली गई।
तैनाती की बार आई तो सामान्य व्यक्तियों को तैनात कर दिया गया। इसी तरह कुछ के पूर्व सैनिक होने के फर्जी कागजात ही तैयार कर दिए गए। इसकी जांच सीबीआई कर रही है। बता दें कि सुरक्षा का यह कारोबार सालाना पचास करोड़ का है। साथ ही इससे कोल, कबाड़ और डीजल चोरों के सिंडीकेट का भी संबंध होने की बात सामने आ चुकी है।