तपिश गहराने के साथ ही ऊर्जाधानी के रूप में पहचान रखने वाले अनपरा-ओबरा परिक्षेत्र के बीच स्थित भाठ क्षेत्र में बूंद-बूंद पानी के लिए हायतौबा मचने लगी है।
तेजी से जवाब देते हैंडपंपों ने नींद उड़ा दी है। सैकड़ों ग्रामीण प्यास बुझाने से लेकर रोजमर्रा की जरूरत के लिए चुआड़ और नाले के दूषित पानी पर निर्भर हो गए हैं।
घूंघट की ओट में महिलाएं पानी लेने के लिए अलसुबह ही पनघट पर जमा हो जा रही हैं। पुरुष और बच्चे भी सुबह से शाम तक पानी के लिए एक से दो किमी तक दौड़ लगाने को विवश हो उठे हैं।
अनपरा से महज दो से तीन किमी की दूरी पर स्थित कुबरी और डूमरचुआ में अभी से एक से दो किमी की दौड़ लगनी शुरू हो गई है।
कुबरी की कबूतरी देवी, डूमरचुआ निवासी ममता, सुमन बताती हैं कि अनपरा-मिर्चाधुरी रोड से सटे लाले यादव के घर के पास स्थित हैंडपंप ही दो किमी एरिया में फैली बस्ती के लोगों के प्यास बुझाने का सहारा बना हुआ है।
सुबह से ही यहां एक से दो किमी दूर से लोगों का आना शुरू हो रहा है। देर शाम तक यही स्थिति देखने को मिली रही है। नहाने और अन्य जरूरतों की पूर्ति के लिए बाउलियों और चुआड़ों का सहारा लिया जा रहा है।
मिर्चाधुरी गांव में भी अधिकांश हैंडपंप जवाब दे गए हैं। राजन, ओमप्रकाश आदि बताते हैं कि जो चालू भी हैं तो उसमें से अधिकांश लाल रंग का पानी उगल रहे हैं।
इसके चलते यहां की आधे से अधिक आबादी धुरकहिया नाला और इससे थोड़ी दूरी पर स्थित चुआंड़ पर निर्भर हो गई है। रणहोर गांव के रामचंद्र, मोटका खैर बस्ती के प्रकाश कनौजिया, सुरेश कनौजिया, रविशंकर, जयशंकर, योगेंद्रा निवासी रूपचंद, मनोज आदि ग्रामीणों का भी यहीं कहना है।
हालत यह है कि सुबह-शाम तो पानी के लिए दौड़ लग ही रही है। चिलचिलाती धूप में खासकर, बच्चों को पानी के लिए दौड़ लगाने को विवश है।
उधर, रणहोर प्रधान अजयप्रकाश पांडेय का कहना है कि जिन हैंडपंपों ने जवाब दे दिया है, उनके रिबोर का प्रस्ताव भेजा जा चुका है। कुछ हैंडपंप लाल रंग का पानी उगल रहे हैं, जिसकी भी जानकारी अधिकारियों को दे दी गई है।