सोनभद्र। केंद्र सरकार ने मार्च 2026 तक देश के प्रत्येक नक्सल प्रभावित जिले को इसके दंश से मुक्ति दिलाने का लक्ष्य रखा है। सोनभद्र में नक्सली गतिविधियों पर काफी पहले अंकुश लगाया जा चुका है। अब उससे जुड़े मुकदमों में भी तेजी से सुनवाई कर दहशत फैलाने वालों को सजा सुनाई जा रही है।
पिछले दो साल में 20 मामलों में फैसले सुनाए जा चुके हैं। सात मामलों में दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। सबसे अहम निर्णय छह इंच छोटा करने का नारा बुलंद करने वाले मुन्ना से जुड़ा है। उसे महज दो साल के भीतर पांच मामलों में उम्रकैद की सजा सुनाई जा चुकी है।
अभी हार्डकोर नक्सली मुन्ना, यूपी में नक्सलवाद के जनक लालव्रत कोल और मुन्ना का दाहिना हाथ माने जाने वाले अजीत कोल सहित अन्य से जुड़े नौ मुकदमों की सुनवाई जारी है। उन मामलों में भी जल्द फैसला आने की उम्मीद जताई जा रही है।
ऐसे मामलों में नहीं बरती जा सकती सहानुभूति : कोर्ट
फैसले सुनाते हुए न्यायालय ने माना कि नक्सली का कार्य व्यवहार समाज में भय उत्पन्न करके नक्सली कार्यवाही को बढ़ावा देना होता है। कुल्हाड़ी से गर्दन उड़ाने के मामलों में कोर्ट ने कहा था कि ऐसी वारदात घोर आपराधिक मानसिकता को दर्शाती है। ऐसे मानसिकता वाले व्यक्ति को अदालत से भी प्रकार की उदारता या सहानुभूति नहीं मिल सकती।
वर्जन -
ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत अपराधियों को सजा दिलाई जा रही है। प्रभावी पैरवी की वजह से महज दो सालों में नक्सलियों से जुड़े 20 मामलों में फैसले आ चुके हैं। सात में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। नौ मामले लंबित हैं, जिसके जल्द निस्तारण का प्रयास किया जा रहा है। - त्रिभुवन नाथ तिवारी, एएसपी ऑपरेशन।