विश्व हिंदू परिषद के संरक्षक अशोक सिंहल का ऊर्जांचल से गहरा नाता रहा। सोनभद्र में पहला दौरा उनका ऊर्जांचल में ही हुआ था। इस दौरान जब उनसे हिंदुत्व के साथ ही आगे की रणनीति के बारे में पत्रकारों ने सवाल पूछा था, तभी उन्होंने राम मंदिर को लेकर अपनी मंशा स्पष्ट कर दी थी।
बाद में अनपरा में हुई सभा में भी उन्होंने मंदिर मुद्दे को लेकर कड़े तेवर दिखाए थे। मंगलवार की शाम जैसे ही उनके निधन की खबर मिली, हिंदू समाज के लोगों में शोक की लहर दौड़ गई। वहीं कई लोगों के जेहन में उनके साथ बिताए गए पलों की भी याद ताजा हो गई।
सोनभद्र में उनका पहला दौरा वर्ष 1987 में हुआ था। तब उन्होंने बीजपुर स्थित स्टेडियम में सभा की थी। यहां के बाद उन्होंने शक्तिनगर का दौरा किया था।
इस दौरान पत्रकारों की ओर से पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने हिंदुत्व को एक धर्म नहीं विचारधारा तो बताया ही था कि कहा था कि सबसे अधिक सहिष्णुता कहीं है तो वह हिंदू धर्म में है।
राम मंदिर आंदोलन के प्रणेता माने जाने वाले अशोक सिंहल ने पहले दौरे के दौरान ही अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के प्रति प्रतिबद्धता जता दी थी और बाबरी मस्जिद ढांचा को वहां से हटाने की मांग भी कर डाली थी।
ऊर्जांचल में दूसरी बार उनका दौरा वर्ष 1991 में अनपरा के रामलीला मैदान पर हुआ था। उस दौरान उन्होंने हिंदुत्व का शंखनाद किया था, मंच से राम मंदिर निर्माण को लेकर कड़े तेवर भी दिखाए थे।
छह दिसंबर 1992 को बाबरी ढांचा विध्वंस के बाद तो वह ऊर्जांचल नहीं आए, लेकिन विहिप, भाजपा नेताओं के साथ ही हिंदू समाज से जुड़े अन्य लोगों के जेहन में उनकी याद ताजा बनी रही।
विहिप की रेणुकूट इकाई (ऊर्जांचल) के जिलाध्यक्ष अशोक कुमार गुप्ता, भाजपा काशी प्रांत के क्षेत्रीय मंत्री गोविंद यादव, पूर्व जिलाध्यक्ष ओंकार केशरी, धर्मवीर तिवारी आदि ने उनके साथ गुजारे गए पलों को साझा किया। कहा कि सिंहल के रूप में हिंदू समाज की अपूरणीय क्षति है, जिसकी कमी लंबे समय तक खलेगी।